जाति भावनाओं से आर्थिक विकास रुकता है। इससे वे स्थितियां पैदा हो जाती हैं जो कृषि तथा अन्य क्षेत्रों में सामूहिक प्रयत्नों के विरुद्ध हैं। जात-पांत के रहते ग्रामीण विकास समाजवादी सिद्धांतों के विरुद्ध रहेगा। इसलिए जातिवाद के कारण जो बड़े-बड़े हजारे बन गए हैं, उन्हें तोड़ा जाए और जमीन उन लोगों में बांट दी जाए, जो उसे जोतते हैं या सामूहिक खेती कर सकते हैं, जिससे शहरों और गांवों में तेजी से विकास हो।
µ डॉ. भीमराव अम्बेडकर