16. बहिष्कृत व्यक्ति अछूत कब हो गए? - Page 165

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

पृथक करने के लिए लकड़ी के टुकड़े से एक विशेष प्रकार की आवाज करते हैं। लोगों को उनके आगमन का पता लग जाता है वे उनसे बच कर चलते हैं। इस प्रदेश में लोग न सुअर पालते हैं न मुर्गी। ये पशुओं का क्रय-विक्रय भी नहीं करते। इनके यहां खुले बाजारों में न पशु वधशालाएं हैं और न शराब की दुकानें। क्रय-विक्रय में ये कौडि़यों का उपयोग करते हैं। चांडालों का काम है केवल शिकार करना और बेचना।’’

क्या इस उद्धरण को फाहियान के समय अस्पृश्यता की उपस्थिति का प्रमाण स्वीकार किया जा सकता है? चांडालों के प्रति जो व्यवहार किया जाता था उस वर्णन के एक हिस्से से ऐसा अनुमान निकाला जा सकता है कि फाहियान के समय छुआछूत का अस्तित्व था।

किंतु इस निष्कर्ष के स्वीकार करने में एक कठिनाई है। कठिनाई इस कारण पैदा होती है जो कुछ कहा गया है, वह केवल चांडालों के विषय में ही है। छुआछूत का अस्तित्व अथवा अनस्तित्व सिद्ध करने के लिए चांडालों का उदाहरण एक अच्छा उदाहरण नहीं है। ब्राह्मण चांडालों को अपना परंपरागत शत्रु समझते रहे हैं। उनके लिए यह स्वाभाविक है कि वे उन पर घृणित आचरण का आरोप लगाएं, उनके लिए नीच शब्दों का प्रयोग करें और अपनी जुगुप्सा की शांति के लिए उनके प्रति विषवमन का मिथ्या प्रचार करें। इसलिए जो कुछ भी चांडालों के बारे में कहा गया है उस पर बहुत सोच विचार कर विश्वास करना चाहिए।

यह तर्क केवल कल्पना पर ही आधारित नहीं है। जिन्हें इस पर सन्देह हो वे प्रमाणस्वरूप बाण की कादम्बरी में दिए गए चांडालों के प्रति भिन्न व्यवहार पर विचार कर सकते हैं।

कादम्बरी की कथा बड़ी गूढ़ है। वास्तव में उससे हमारा विशेष संबंध भी है। हमारे उद्देश्य के लिए इतनी जानकारी पर्याप्त है कि यह कथा एक चांडाल कन्या द्वारा पाले गए वैशम्पायन नामक तोते ने राजा शूद्रक को सुनाई है। कादम्बरी ख्1, का निम्नलिखित उदाहरण हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है। बाण ने चांडाल बस्ती का जो वर्णन किया है उसी से आरंभ करना ठीक होगा। वह इस प्रकार हैः-

फ्मैंने बर्बरों की बस्ती देखीµदुष्कर्मों का साक्षात बाजार। चारों ओर लड़के शिकारी कुत्तों को खोल कर दौड़ाते हुए, अपने बाजों को सिखाते हुए अपने जाल की मरम्मत करते हुए, हथियार लिए हुए, मछली पकड़ते हुए, वेशभूषा में भूतों के समान भयानक लग रहे हैं। घने बांस के जंगलों से घिरी उनकी बस्तियों के दरवाजों का अनुमान

  1. कादम्बरी (रीडिंग ट्रांसलेशन), पृ. 204