16. बहिष्कृत व्यक्ति अछूत कब हो गए? - Page 168

बहिष्कृत व्यक्ति अछूत कब बने?

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था, निद्रा की तरह वह आंखों को मोहित करती थी। जिस प्रकार जंगल में एक कमल सरोवर हाथियों से आंदोलित करता है, उसी प्रकार अपने मातंग जन्म के कारण कुछ आभाहीन थी, देवता की तरह उसका स्पर्श नहीं किया जा सकता, यंत्र की तरह वह केवल आंखों को सुख देने वाली थी, वसंत के फूलों की तरह वह जाति पुष्प विहीन थी। कामदेव के धनुष की तरह उसकी क्षीण कटि हाथ से तानी जा सकती थी, और उसके घुंघराले बाल, अल्कापुरी, के यक्षराज की लक्ष्मी के समान थे, उसका तारुण्य अभी खिला ही था, वह अत्यंत सुंदर थी। राजा को आश्चर्य हुआ। वह सोचने लगा कि विधाता ने इस सौंदर्य को अस्थान (अनुचित स्थान) पर उत्पन्न किया। क्योंकि यदि वह अपने चांडाल रूप का उपहास करने के लिए पैदा हुई है और सारे संसार के सौंदर्य रूपी धन का उसके द्वारा उपहास होता है तो वह एक ऐसी जाति में क्यों पैदा हुई कि कोई उसका उपयोग ही न कर सके, निस्संदेह प्रजापति ने केवल अपनी कल्पना से ही इसकी रचना की है। उसे डर रहा कि मातंग जाति के स्पर्श से कहीं उसे दंड न भोगना पड़े अन्यथा यह अछूत सौंदर्य तो हाथ से बनाए अंगों में आ ही नहीं सकता, कहां से आया? और यद्यपि इसका रूप सुंदर है तो भी अपने जन्म की नीचता के कारण वह मर्त्यलोक की लक्ष्मी की तरह देवताओं की निरंतर निंदा का कारण है, तथा अपने सौंदर्य के ही कारण इस प्रकार की विचित्र रचना करने वाले ब्रह्मा के मन में भय का संचार करती है।

जिस समय राजा इस प्रकार विचार कर रहा था वह कन्या बड़े विश्वास के साथ जो उसकी आयु से परे की चीज थी, राजा के सामने झुकी, वह कानों तक फूलों से लदी हुई थी। जिस समय वह प्रणाम करके जडि़त फर्श पर आगे बढ़ी तो उसके सेवक ने वह तोता लिया जो अभी पिंजरे में ही था और दो बार कदम आगे बढ़ा कर उसे राजा को दिखाते हुए कहाःµ

श्रीमान इस तोते का नाम वैशम्पायन है। यह सब शास्त्रों का अर्थ जानता है। यह राजनीति के व्यवहार में कुशल है। यह कथा, इतिहास और पुराणों का पंडित है। यह संगीत के लय ताल से सुपरिचित है। यह सुंदर अद्वितीय आधुनिक प्रेमकथाओं, नाटकों और कविताओं की रचना करता है तथा हमें सुनाता है। यह वाव्Qपटु है और वीणा, बांसुरी तथा मृदंग वादन में अद्वितीय है। यह नृत्यकला का पंडित है और चित्रकला में भी चतुर है। यह क्रीड़ा में भी बहादुर है और प्रेमकलह में क्रोधित तरुणी को शांत करने के उपाय खोज निकालने में भी पंडित है। यह हाथियों, घोड़ों, आदमियों तथा स्त्रियों के लक्षणों का ज्ञाता है। यह सारी पृथ्वी का रत्न है। मेरे स्वामी की पुत्री यही विचार करके जिस प्रकार मोतियों का स्थान समुद्र है उसी प्रकार पृथ्वी के धन आप के हैं इसे आपको समर्पित करने के लिए लाई हूं। हे राजन इसे स्वीकार करें।’’