4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
इस पुस्तक में अस्पृश्यता के जिस सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया है वह एक सर्वथा नया सिद्धांत है। इसमें निम्नांकित बातें हैंः
हिन्दुओं और अछूतों के बीच नस्ल का कोई अंतर नहीं है।
आरंभ में हिंदुओं और अछूतों के बीच अंतर, छुआछूत शुरू होने से पहले
एक कबीले के सदस्यों और दूसरे कबीले के छितरे हुए कबीले के सदस्यों
के बीच अंतर था। अंततः एक बहिष्कृत कबीले के छितरे हुए लोग फ्अछूतय्
कहलाए।
- जैसे नस्ल छुआछूत का आधार नहीं है वैसे ही व्यवसाय भी अस्पृश्यता का
आधार नहीं है।
- अस्पृश्यता की उत्पत्ति के दो मूल कारण हैंः-
(क) ब्राह्मणों द्वारा बहिष्कृत लोगों और बौद्धों के प्रति तिरस्कार भाव रखना
तथा घृणा करना।
(ख) बहिष्कृत लोगों द्वारा गोमांस भक्षण जारी रखना जबकि दूसरों ने उसे
त्याग दिया था।
- अस्पृश्यता का उद्गम तलाश करने के लिए अछूतों और अशुचियों (दूषितों)
के बीच अंतर करने में सावधानी बरतनी चाहिए। सभी हिंदू लेखकों ने
अछूतों को अशुचि बताया है। यह एक गलती है। अस्पृश्य और अशुचि
एक दूसरे से भिन्न हैं।
- अशुचियों का अस्तित्व धर्मसूत्रों के समय से आरंभ होता है जबकि छुआछूत
बहुत बाद में 400 ई. से अस्तित्व में आई।
ये निष्कर्ष इतिहास की खोज का परिणाम हैं। एक इतिहासकार के सामने क्या लक्ष्य होना चाहिए। उसकी गेटे ने परिभाषा दी है। ख्1, वे कहते हैं µ
फ्इतिहासकार का कर्तव्य है कि वह सच्चाई को झूठ से और निश्चय को अनिश्चय, असंदिग्ध को संदिग्ध से अलग करने के लिए नीर-क्षीर विवेक से काम ले...प्रत्येक
खोजकर्ता को सब बातों पर विचार करने से पूर्व एक न्यायकर्ता की भावना अपनानी चाहिए। उसे उन्हीं बातों पर विचार करना है जिसके साक्ष्य सम्पूर्ण हों, प्रमाण स्पष्ट हों तभी वह अपना निष्कर्ष निकालता है और अपनी राय देता है, भले ही उसका मत उसके पूर्वगामी व्यक्ति से मेल न खाए।य्
जहां तक प्रासंगिक और आवश्यक तथ्यों का संबंध है गेटे के उपदेश पर आचरण करने में कोई कठिनाई नहीं हो सकती। उनका उपदेश बहुत मूल्यवान और आवश्यक