3. अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं? - Page 51

36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

10.54. भोजन उन्हें किसी नौकर आदि द्वारा टूटे हुए बर्तन में दिया जाए। रात

को वे गांव या नगर में नहीं घूमें।

10.55. दिन में वे अपने काम के लिए जा सकते हैं किन्तु उन्हें राजाज्ञा से

सचिन्ह होना चाहिए। हां, यह शास्त्रोक्त मर्यादा है कि वे ऐसे व्यक्तियों

की लाश शमशान ले जावें जिनका कोई संबंधी न हो।

10.56. राजाज्ञा से वे दंड नीति के अनुसार सदैव अपराधियों का वध करें और

वे उन अपराधियों के वस्त्र, बिस्तरे और गहने ले लें।

लेकिन शास्त्रों के इन कथनों का क्या निष्कर्ष निकाला जाए? उनकी दोहरी व्यवस्था की जा सकती है। जब शास्त्र कहते हैं कि अछूतों को गांव के बाहर रहना चाहिए, तो उनका इतना ही हो सकता है कि अछूतों को वहीं रहना चाहिए, जहां वे ठहरते हैं। यह एक व्याख्या है। दूसरी व्याख्या यह हो सकती है कि जिन्हें अछूत घोषित कर दिया गया है उन्हें गांव के अंदर रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि उन्हें गांव के बाहर जाकर अपने टोलों में रहने के लिए मजबूर करना चाहिए। शास्त्रों की इन दोनों व्याख्याओं से दो संभावनाएं उत्पन्न होती हैं। एक तो यह है कि अछूतों के गांव के बाहर जाकर रहने का छुआछूत से कोई संबंध नहीं। एकदम आरंभ से ही वे गांव के बाहर रहते आए हैं। उसके बाद जब उनके माथे पर अस्पृश्यता का कलंक लगा, तो उनका गांव में आना निषिद्ध हो गया। दूसरी संभावना यह है कि गांव से बाहर रह रहे अछूतों का अस्पृश्यता से पूरा-पूरा संबंध है। दूसरे शब्दों में अछूत पहले मूलतः गांव के अंदर रहते रहे हैं, बाद में जब उनके माथे पर छुआछूत का कलंक लगा तो वे गांव को खाली करके गांव से बाहर रहने पर मजबूर हुए।

इन दोनों बातों में से कौन-सी बात अधिक मान्य है।

दूसरी संभावना तो स्पष्ट तौर पर ही निरर्थक और बेसिर पैर की कल्पना है। इसके खोखलेपन को दिखाने के लिए एक ही तर्क काफी है। हम जिस बात पर विचार कर रहे हैं वह किसी गांव अथवा किसी एक क्षेत्र की बात नहीं है। यह समस्त भारतवर्ष में व्याप्त है। अछूतों को गांव से निकालकर बाहर बसाना बहुत बड़ी बात है। किसने और कैसे यह इतनी बड़ी व्यवस्था की होगी? यह किसी चक्रवर्ती राजा की आज्ञा के बिना नहीं हो सकती थी। उसके लिए भी उन्हें इस प्रकार एक जगह से हटाकर दूसरी जगह बसाना असंभव कार्य था। चाहे संभव हो चाहे असंभव हो यह किसी चक्रवर्ती राजा का ही कार्य हो सकता है। यह कौन सा चक्रवर्ती राजा है जिसे इसका जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? स्पष्ट ही है कि भारत में कोई ऐसा राजा नहीं हुआ जिसने यह कार्य किया हो। यदि भारत में ऐसा कोई राजा नहीं हुआ