3. अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं? - Page 52

अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं?

तो यह दूसरी संभावना छोड़ देनी चाहिए।

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अब जिस बात पर विचार किया जा सकता है वह यही है कि जो लोग अछूत कहलाते हैं वे अछूत कहलाना आरंभ करने से भी पहले, एकदम आरंभ से ही गांव के बाहर रहते थे और बाद में अछूत बना दिए जाने के कारण उन्होंने बाहर ही रहना जारी रखा। लेकिन इससे एक बहुत ही कठिन प्रश्न पैदा होता है कि वे गांव के बाहर क्यों रहते थे? उन्हें ऐसा करने के लिए किसने मजबूर किया? इसका उत्तर यही है कि समाज शास्त्र के विद्यार्थी को संसार भर में आदिम समाज के वर्तमान रूप धारण करने के संबंध में जिन बातों की जानकारी है उनका ख्याल करके यही मानना स्वाभाविक लगता है कि अछूत आरंभ से ही गांव के बाहर रहते आए हैं।

जब तक उन बातों की कुछ व्याख्या न कर दी जाए जिनके कारण आदिम समाज ने वर्तमान स्वरूप ग्रहण कर लिया तब तक शायद अधिकांश लोग यह नहीं समझ सकेंगे कि उपर्युक्त मत स्वाभाविक क्यों है। इस बात को अच्छी तरह समझने के लिए यह आवश्यक है कि हम यह ध्यान रखें कि वर्तमान समाज आदिम समाज से दो बातों में भिन्न है। आदिम समाज खानाबदोश जातियों का बना था और वर्तमान समाज स्थिरतापूर्वक एक जगह बनी बस्तियों का जाति समूह है, तथा आदिम समाज रक्त संबंध पर आधारित कबीलों का एक समूह था। वर्तमान समाज नस्लों का समूह है। दूसरे शब्दों में आदिम समाज ने वर्तमान स्वरूप तक पहुंचने के लिए दो तरफ अपना विकास किया। विकास की एक धारा ने आदिम समाज को कबायली अवस्था से लेकर नस्ल की अवस्था तक पहुंचा दिया। इसमें कोई संदेह नहीं कि ऐसा परिवर्तन हुआ है। इस प्रकार के परिवर्तन के स्पष्ट चिन्ह राजकीय उपाधियों में दिखाई देते हैं। अंग्रेजी राजाओं की उपाधियों को ही लीजिए। जॉन ही वह पहला सम्राट था जिसने अपने आपको इंग्लैंड का सम्राट कहा। उसके पूर्वज सामान्यतया अपने आपको अंग्रेजों का राजा कहते आए थे। पहला कथन एक प्रजाति का प्रतिनिधित्व करता है दूसरा एक परिवार जाति का। इंग्लैंड कभी एक देश था जहां अंग्रेज निवास करते थे। अब अंग्रेज वे लोग हैं जो इंग्लैंड में निवास करते हैं। इसी प्रकार का परिवर्तन फ्रांसीसी राजाओं की उपाधियों में दिखाई देता है कभी वे फ्रांसीसियों के राजा कहलाते थे, किंतु आगे चलकर फ्रांस के राजा कहलाने लगे।

विकास की दूसरी धारा ने आदिम समाज को घुमन्तु समाज न रहने देकर एक स्थिर समाज बनाया। यह परिवर्तन भी इतना निश्चित और प्रभावोत्पादक है कि इसकी वास्तविकता का विश्वास कराने के लिए किसी उदाहरण की आवश्यकता नहीं।

इस समय हमें अपने उद्देश्य के लिए इतना कहना पर्याप्त है कि हम विकास