अछूत गांव के बाहर क्यों रहते हैं?
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को जबरदस्ती हांक लेना। जब कुछ कबीले अथवा जातियां अभी तक घुमन्तु जीवन व्यतीत कर ही रही थीं तो उनके लिए एक जगह बसे हुए लोगों के साथ टकराव और भी आसान हो गया। दूसरे खानाबदोश लोगों के साथ लड़ाई करने की अपेक्षा इसमें अधिक लाभ था। खानाबदोश जातियों की समझ में यह बात आ गई थी कि एक स्थान पर बस जाने वाली जातियों के पास दोहरी सम्पति थी। घुमन्तु कबीलों की तरह ही इनके पास भी पशु थे और इसके अतिरिक्त उनके पास भूमि थी जिसे देखकर घुमन्तु लोगों को लालच होता था। घुमन्तु कबीले स्थिर बसी हुई जातियों पर लगातार संगठित रूप में आक्रमण करते थे, जिससे वे उनका धन ले जा सकें। तीसरी बात यह है कि एक जगह बसी हुई जातियां इन घुमन्तु कबीलों से अपनी रक्षा करने के मामले में कमजोर थीं। क्योंकि वे अधिक लाभ के धंधे में लग गई थीं। इसलिए वह व्यवसाय की अनदेखी करके मारकाट में ही नहीं लगी रहना चाहती थीं। वे अपने घर छोड़कर इन घुमन्तु कबीलों का पीछा भी नहीं कर सकती थीं। इसमें कुछ भी आश्चर्य की बात नहीं है। इतिहास बताता है कि जिन लोगों के पास अपनी रक्षा के साधन नहीं होते थे दूसरे असभ्य लोगों का मुकाबला नहीं कर सकते थे। इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि खानाबदोश जातियां जब एक जगह बसने लगीं तो उनके सामने आत्म रक्षा की समस्या क्यों और कैसे उपस्थित हुई।
उधर यह समझना कठिन नहीं कि छितरे हुए लोगों की समस्या कैसे उत्पन्न हुई।
यह कबीलों के निरंतर युद्ध का ही परिणाम है, जो कबीलों की उस आदिम अवस्था में उन कबीलों अथवा जातियों का सामान्य जीवन था। इन कबीलों के युद्धों में प्रायः ऐसा होता था कि एक कबीलों का सर्वथा सफाया तो नहीं होता था किंतु वह परास्त होकर बिखर जाता था। बहुधा जो दल परास्त हो जाता था वह टुकड़े-टुकड़े हो जाता था। इसके परिणामस्वरूप समाज के विकास की आदिम अवस्था में एक बड़ी जनसंख्या जो इसी प्रकार परास्त होकर बिखरे लोगों की थी इधर-उधर घूमती रहती थी यह समझने के लिए कि इन छितरे-बिखरे हुए लोगों की समस्या क्यों उत्पन्न हुई, इस बात को समझना आवश्यक है कि आदिम समाज का संगठन कबीलाई था। ऐसा होने के दो अर्थ थे। पहला यह कि आदिम समाज में प्रत्येक व्यक्ति का किसी न किसी कबीले से संबंध था। इतना ही नहीं उसे किसी न किसी कबीले का होकर रहना पड़ता था तभी उसका अस्तित्व था। दल से बाहर किसी व्यक्ति का कोई अस्तित्व न था, या हो ही नहीं सकता था। दूसरे कबीलाई संगठन का आधार रक्त का संबंध था और कोई भी व्यक्ति जो एक कबीले से पैदा हुआ हो तो वह दूसरे कबीले में सम्मिलित