7. छुआछूत की उत्पत्ति का आधर-नस्ल का अंतर - Page 74

छुआछूत की उत्पत्ति का आधारµनस्ल का अंतर

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इतिहास नागों और राजकीय परिवारों के बीच निकट वैवाहिक संबंधों का भी साक्षी है। कदम्ब-नरेश कृष्णवर्मा ख्1, के देवगिरि शिला-लेख के अनुसार कदम्बकुल का नागों से संबंध था। नवीं शताब्दी के राजकोट ख्2, के दान पत्र में अश्वत्थामा-एक के नाग कन्या के साथ विवाह का उल्लेख है। उन्हीं की संतान स्कंद शिष्य ने पल्लव वंश की स्थापना की। नवीं शताब्दी के ही एक दूसरे पल्लव शिला-लेख के अनुसार वीर-कुर्च पल्लव वंश का राजा था। इसी शिला-लेख में उल्लेख है कि उसने एक नाग कन्या से विवाह किया था और उससे उसे राज्य चिन्ह ख्3, मिला था। वाकाटक नरेश प्रवरसेन के पुत्र गौतमी-पुत्र का भारवि नरेश भवनाग की पुत्री के साथ विवाह करना एक ऐतिहासिक घटना है। इसी प्रकार चन्द्रगुप्त द्वितीय का नाग-कुल ख्4, की कुबेर नाग नामक कन्या से विवाह हुआ। एक तमिल कवि का कहना है कि कोक्किल्ली नाम के एक प्राचीन चोल नरेश ने एक नाग कन्या ख्5, से विवाह किया। राजेन्द्र चोल को भी अपनी तेजस्विता के कारण नाग कन्या ख्6, का पाणिग्रहण करने का श्रेय दिया जाता है। नावसाहशांक चरित में परमेश्वर नरेश सिंधुराज (जिसने दसवीं शताब्दी के प्रथम भाग में राज्य किया होगा), और शशिप्रभा नामक नाग ख्7, कन्या के विवाह का इतने विस्तार और ऐसी यथार्थता से वर्णन है कि हमें लगभग यह विश्वास हो जाता है कि इस कथन में कुछ ऐतिहासिकता अवश्य होगी। 973-1830 वि.स. के हर्ष के शिलालेख में हमें आभास मिलता हैµगुवाक प्रथम नागों और कुमारों ख्8, की सभाओं में वीर रूप में प्रसिद्ध था। यह नरेश विग्रहराज चाहमान से ऊपर की पीढ़ी में छठा था। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह नवीं शताब्दी के मध्य में राज्य करता रहा होगा। उड़ीसा के भौमन वंश के शान्तिकार के पुत्र के एक शिलालेख से पता चलता है कि उसने नाग परिवार की त्रिभुवन महादेवी ख्9, से विवाह किया था। शान्तिकार का समय 921 ई. के आस-पास समझना चाहिए।

नाग सांस्कृतिक विकास की ऊंची अवस्था को तो प्राप्त थे ही इतिहास से यह भी प्रकट होता है कि वह देश के एक बड़े भू-भाग पर राज्य भी करते थे। यह कहने की आवश्यकता नहीं कि महाराष्ट्र नागों का क्षेत्र है। यहां के लोग और यहां के राजा नाग थे ख्10,

  1. आई. ए. 7, पृष्ठ 34

  2. ई. आई. 15, पृष्ठ 246

  3. एस. आई. 1-2, पृष्ठ 508

  4. ई. आई. 15, पृष्ठ 41

  5. ई. आई. 15, पृष्ठ 249

  6. आई. ए. 22, पृष्ठ 144-149

  7. ई. आई. 1, पृष्ठ 229

  8. जे. बी. ओ. आर. एस. 16, पृष्ठ 771

  9. ई. आई. 2, पृष्ठ 117

  10. रजवाडे