7. छुआछूत की उत्पत्ति का आधर-नस्ल का अंतर - Page 75

60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

एक से अधिक प्रमाणों से यह पता चलता है, ईसा की आरंभिक शताब्दियों में आंध्र देश और उसका पड़ोस नागों के अधीन था। सातवाहन और उनके छुतुकुल शातकर्मी उत्तराधिकारियों का रक्त नाग रक्त ही था। जैसा. डॉ. एच. सी. रायचौधरी ने निर्देश किया है सातवाहन वंश के पौराणिक प्रतिनिधि सालीहरण को पूनिया शत्पुकलिला ने ब्राह्मण और ख्1, नाग के मेल से उत्पन्न स्वीकार किया है। उनकी वंशावलियों में जो नमूने के नाग नाम मिलते हैं उनसे यह बात अच्छी तरह सिद्ध हो जाती है। अनेक घटनाओं से यह भी सिद्ध होता है कि सातवाहन राज्य के अंतिम दिनों में नाग बहुत शक्तिशाली हो गये थे। सातवाहन वंश की मुख्य शाखा के अंतिम नरेश पुलुमवी के शासन काल में स्कन्दनाग नामक राजा राज्य करता था। दूसरे एक छुतु नरेश की कन्या नाग मुलनिका के बारे में उल्लेख है कि उसने शिकन्द नाग श्रीनाम के अपने पुत्र के साथ एक नाग की भेंट दी। इस वंश के सभी ज्ञात नरेशों के नाम यहीं हैं। इससे नागों से निकट संबंध सिद्ध होता है। तीसरे, सोरिनगोई की राजधानी उरगपुर के नाम से यह बात झलकती है कि यहां किसी नाग-राजा का अलग से राज्य नहीं था, किंतु उस चिरकाल स्थित प्रदेश में वह नागों का एक उपनिवेश था।

सिंहल और स्याम की बौद्ध अनुश्रुति से भी हमें यह ज्ञात होता है कि करांची ख्2, के पास मजेरिक नाम का एक नाग प्रदेश था।

तीसरी और चौथी शताब्दी के प्रारंभ में उत्तरी भारत में भी अनेक नाग नरेशों का शासन रहा है। यह बात पुराणों, प्राचीन सिक्कों तथा लेखों से सिद्ध होती है। विदिशा, चम्पावती, पदमावती और मथुरा का विशेष उल्लेख मिलता है कि उनकी असंदिग्ध है। यहां यह संभव नहीं है कि हम द्वितीय समूह के सिक्कों के विवाद में पड़ें अथवा इन पौराणिक राजाओं के साथ अच्सुत गणपति नाग से इलाहाबाद स्तम्भ के नागसेना को मिला ख्3, सकें। प्राचीन, भारतीय इतिहास में, जितने नागों का उल्लेख है, उनमें से चौथी शताब्दी के नाग परिवार ख्4, सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक दृष्टि से युक्तियुक्त प्रतीत होते हैं। हमें पता नहीं कि लाहौर की ताम्र मुद्रा ख्5, के नागभट्ट और उनके पुत्र महाराज महेश्वर नाग उक्त तीन परिवारों में से किसी एक के थे, या स्वयं एक पृथक नाग परिवार था। लेकिन इन सबसे डॉक्टर सी.सी. रायचौधरी के निष्कर्ष का समर्थन होता है कि उत्तर भारत में चतुर्थ शताब्दी के कुषाण राज्यों को नागों ने जीत लिया तो वे लुप्त हो गए।

ये नाग उत्तरायण के विभिन्न प्रदेशों में शासन करते रहे होंगे। कालांतर में उन्हें

  1. आई. पी. एच.. ए. आई., पृष्ठ 280

  2. जी. आई., पृष्ठ 68

  3. वही, पृष्ठ 59

  4. आई. ए. 8, पृष्ठ 82

  5. बी. गंज. 11, पृष्ठ 115