62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
दो भिन्न नाम हैं? प्रचलित धारणा या मत तो यह है कि साधारणतः दो भिन्न नस्लों के नाम हैं। इससे लोगों को आश्चर्य होगा लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि द्रविड़ और नाग एक ही नस्ल की दो भिन्न शाखाएं हैं और उससे भी कम लोग यह स्वीकार करेंगे कि फ्नागोंय् के रूप में द्रविड़ों ने न केवल दक्षिण भारत पर बल्कि उत्तर और दक्षिण सारे भारत पर आधिपत्य बनाए रखा है, किंतु यह ऐतिहासिक सत्य है। हम देखें कि इस विषय में विद्वानों का क्या मत है। श्री दीक्षितय्यरµएक प्रसिद्ध दक्षिणात्य विद्वान ने अपनी रामायण में फ्दक्षिण भारतय् शीर्ष लेख में लिखा हैःµ
फ्एक अन्य आदिवासी नाग जो देवतुल्य है जिसका देवी चिन्ह सर्प है।य्
सातवें अखिल भारतीय प्रास्थ विद्या सम्मेलन का कार्यवृत्त पृ. 248-49 पश्चिम-उत्तर में तक्षशिला से लेकर उत्तर पूर्व में असम तक और सिंहल तथा दक्षिण भारत में भी, इस प्रकार सारे भारत में फैले थे। एक समय वे शक्तिशाली रहे होंगे। या तो यक्षों (यकवों) के समकालीन या राजनीतिक सत्ता के तौर पर उसके पतन के बाद दक्षिण भारत में नागों की प्रधानता हुई। न केवल सिंहल वरन् प्राचीन मालाबार के प्रदेशों पर भी प्राचीन नागों का अधिकार था। ईसा के बाद की आरम्भिक शताब्दियों के तमिल ग्रंथों में प्रायः नागनद का उल्लेख आता है। अभी तक मालाबार में नाग पूजा के अवशेष यथावत चले आ रहे हैं। दक्षिण त्रावणकोर का नागरकोयल मंदिर आज भी नागपूजा को समर्पित है। उनके बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि नाग लोग समुद्री लोग (मछुआरे) थे। उनकी स्त्रियां बहुत सुंदर होती थीं। उनकी सुंदरता बहुत प्रसिद्ध थी। ऐसा लगता है कि नाग चेरों में घुल मिल गए थे जो ईसा की प्रथम शताब्दी के आस-पास शक्तिसम्पन्न हुए।
श्री ओल्डहम ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है। उनके मतानुसार ख्2, ःµ
फ्प्राचीन काल से द्रविड़ लोग तीन भागों में बंटे रहे हैं µ चेर, चोल, तथा पाण्ड्य। चेर अथवा सेर (प्राचीन तमिल में सरे) नाग का पर्यायवाची है। चेरमण्डेल, नागद्वीप या नागप्रदेश से स्पष्ट तौर पर यह झलकता है कि दक्षिण के द्रविड़ों की उत्पत्ति असुरों से हुई। इसके अतिरिक्त अभी गंगा घाटी में कुछ ऐसे लोग चारों ओर फैले हुए हैं, जो अपने आपको चेरू या सिओरी कहते हैं और जिनका कहना है कि वह नाग देवता के वंशज ख्3, हैं। चेरू बहुत प्राचीन प्रजाति है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि फ्गंगा घाटीय् के एक बड़े हिस्से पर उनका आधिपत्य रहा है, जिस पर जैसा कि
ई. आई. 6, पृष्ठ 45
द सन एण्ड सर्वेन्ट, पृ. 157-61
एलिस्ट सव ग्लोसरी NWF, 135-136