68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
के ब्राह्मण और पंजाब के चूहड़े के बीच अंतर में कुछ ही कम है। इसका अर्थ हुआ कि संयुक्त प्रांत का ब्राह्मण शारीरिक दृष्टि से अपने प्रांत के क्षत्रिय को बहुत ऊंची जाति के अतिरिक्त शेष सभी जातियों की अपेक्षा पंजाब के चूहड़े और खत्री से अधिक समीप है। संयुक्त प्रांत के ब्राह्मणों के इस विभेद पर विचार करें। संयुक्त प्रांत के ब्राह्मण और बिहार के ब्राह्मण का माप आर्य संस्कृति के प्रसार के हिसाब से सोचा जाए तो शायद बहुत समान होना चाहिए। किंतु उसमें इतना ही भेद है जितना संयुक्त प्रांत के ब्राह्मण और पंजाब के चूहड़े में। ऐतिहासिक आधार पर हम समझते हैं कि बिहार को संयुक्त प्रांत के आस-पास होना चाहिए। किंतु तालिका की ओर देखने से पता लगता है कि कुर्मी ब्राह्मण के समीप है, और चमार तथा डोम ख्1, दूर हैं। लेकिन यहां चमार ब्राह्मण से इतना दूर नहीं है जितना संयुक्त प्रांत का चमार संयुक्त प्रांत के ब्राह्मण से। बंगाल की तालिका देखने से पता लगता है कि सामाजिक सीढ़ी के निचले छठे दर्जे पर जो चाण्डाल ख्2, है जिसका स्पर्श मात्र अपवित्र करता है। उसमें और ब्राह्मण में बहुत अंतर नहीं है। कायस्थ जो दूसरे दर्जे पर हैं, उससे नाम मात्र का भेद है। बंबई में देशस्थ ब्राह्मण जितना चितपावन ब्राह्मण के समीप है उतना ही सोन कोली एक मछुआ जाति के। मराठा प्रदेश की अछूत जाति महारों का कुनवी नामक किसान जाति के साथ-साथ दूसरा नंबर है। इसके बाद आते हैं शेनवी ब्राह्मण, नागर ब्राह्मण और ऊंची जाति वाले मराठे। यह परिणाम कुछ पुराने हैं। सामान्य तौर पर कहा जाए, तो इसका यही मतलब है कि बंबई में सामाजिक ऊंच-नीच और शारीरिक भेद में किसी प्रकार का तारतम्य नहीं है।
अंत में हम मद्रास को लेते हैं। यहां हमें भिन्न-भिन्न भाषागत प्रदेशों को पृथक-पृथक लेना चाहिए। क्योंकि भिन्न-भिन्न प्रदेशों में सामाजिक ऊंच-नीच का स्तर भिन्न-भिन्न है। श्री रिसले और ई. थर्स्टन ने जातियों के क्रम का जो औसत निकाला है, वह इस प्रकार हैµ
कापू, सले, माला, गोल्ला, मादिग, फोगत और कोमति। उनके सामाजिक दर्जे के अनुसार उनका क्रम इस प्रकार है-
ब्राह्मण, कोमति, गोल्ला, कापू और अन्य तथा सले, फोगत और अन्य माला, मादिग का दर्जा सबसे नीचा है, क्योंकि वे तेलुगु प्रदेश के पेरिया (अंत्यज) हैं। कन्नड़ प्रदेश में नासिक माप के अनुसार निम्न क्रम हैं µ
कर्नाटक, स्मार्त, ब्राह्मण, बन्तु, बिल्लिवा, माण्इम ब्राह्मण, बोककालिंगा, गनिंग, लिंग बनजिंग, पंचाल, कुरहा, होलेय, देशष्ठा, ब्राह्मण, सोरेया और बीदर।
डोम बिहार में अछूत हैं।
चाण्डाल बंगाल में अछूत हैं।