7. छुआछूत की उत्पत्ति का आधर-नस्ल का अंतर - Page 84

छुआछूत की उत्पत्ति का आधारµनस्ल का अंतर

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सामाजिक अग्रता के हिसाब से जातियों का क्रम इस प्रकार हैःµ

ब्राह्मण, बंत, बोक्कालिंगा, तोरयू आदि कुरबा और गंनिग, बडगा और कुम्ब और स्लोग, बिल्लिवा, बेद, होलेय।

इस तुलना का महत्व उस समय और भी बढ़ जाता है, जब हम देखते हैं, कि कन्नड़ के अछूत का नासिका माप 75.1 है। जबकि ब्राह्मण का नासिका माप 71.5 है और जंगल के कुम्ब तथा सोलग, जो हिंदू रंग चढ़ने पर जो स्थान उन्हें मिला उस पर स्थित है का नासिका माप 86.1 तथा 85.1 है।

अपनी नासिका माप के हिसाब से तमिल जातियों का क्रम इस प्रकार हैः-

तियन 75, नम्बूद्री 75.5, नायर 76.7, चरूमन 77.2। इनकी सामाजिक अग्रता का स्तर इस प्रकार हैः-

फ्नम्बूद्री, नायर, तियन चरूमन। ट्राबननोर जंगली जाति कानिकर का नासिका माप 84.6 है। इस प्रकार चरूमन (एक अछूत) कानिकर की अपेक्षा ब्राह्मण की नस्ल का है।य्

उक्त उद्धरण में, जो दूसरी जातियों के बारे में कहा गया है, यदि उसे छोड़ दें और केवल अछूत के बारे में जो कुछ कहा गया है उसी पर विचार करें तो यह स्पष्ट है कि पंजाब के चूहड़े का नासिका माप संयुक्त प्रांत के ब्राह्मण समान ही है। बिहार के चमार का नासिका माप बिहार के ब्राह्मण से बहुत भिन्न नहीं है। कन्नड़ के होलेय (अछूत) का नासिका माप कन्नड़ के ब्राह्मण से कहीं ऊंचा है और चेरूमन (तमिल के पेरियाओं से भी निचले दर्जे को प्राप्त) का नासिका माप उसी नस्ल का है जिस नस्ल का तमिलनाडु के ब्राह्मण का। यदि किसी जाति को नस्ल निश्चित करने के लिए मानव शरीर शास्त्र एक विश्वसनीय विज्ञान है, तो हिंदू समाज पर इस शास्त्र के लागू करने के लिए जो परिणाम हैं, उनसे यह बात निश्चित प्रमाणित होती है कि ब्राह्मण और अछूत एक ही नस्ल के हैं। इससे यही परिणाम निकलता है कि यदि ब्राह्मण आर्य हैं तो अछूत भी आर्य हैं। यदि ब्राह्मण द्रविड़ से हैं तो अछूत भी द्रविड़ ही हैं, यदि ब्राह्मण नाग हैं तो अछूत भी नाग हैं। इस स्थिति में राइस का सिद्धांत निराधार सिद्ध होता है।

नस्ल की अस्पृश्यता का आधार होने का सिद्धांत मानव और शरीर शास्त्र के विरुद्ध तो पड़ता ही है, उसे हमारी उस जानकारी से भी किसी तरह का संबल नहीं मिलता जो हमें भारत की नस्लों के बारे में प्राप्त है। यह बात भली-भांति ज्ञात है कि भारत के लोग किसी समय आदिवासियों के आधार पर संगठित थे और यद्यपि अब कबीलों ने जातियों का रूप ले लिया है तो भी कबीलों का संगठन अभी तक