9. बौद्धों का अपमान-छुआछूत का मूलाधर - Page 96

बौद्धों का अपमानµछुआछूत का मूलाधार

पर (1) जो शतप्रतिशत हिंदू थे। (2) जो नहीं थे, में वर्गीकृत किया।

81

जनगणना आयुक्त ने इस वर्गीकरण का जो आधार बनाया यह जनगणना आयुक्त द्वारा जारी परिपत्र में दिया गया है। उसमें उसने दोनों वर्गों को बांटने के लिए खास-खास कसौटियां ख्1, निश्चित की हैं जो शतप्रतिशत हिंदू नहीं। ऐसी जातियों और कबीलों के लक्षण इस प्रकार दिए गए हैंःµ

  1. ब्राह्मणों का प्रभुत्व नहीं मानते।

  2. किसी ब्राह्मण अथवा अन्य किसी माने हुए हिंदू गुरु से मंत्र नहीं लेते।

  3. देवों को प्रमाण नहीं मानते।

  4. हिंदू देवी देवताओं को नहीं पूजते।

  5. अच्छे ब्राह्मण उनका संस्कार नहीं करते।

  6. उसका कोई ब्राह्मण पुरोहित नहीं होता।

  7. हिंदू मंदिरों के गर्भ-गृहों में नहीं जा सकते।

  8. स्पर्श अथवा एक निश्चित सीमा के भीतर आकर उसे अपवित्र कर देते हैं।

  9. अपने मुर्दों को गाढ़ते हैं।

  10. गौमांस खाते हैं और गौ के प्रति श्रद्धा नहीं रखते।

इन दस कसौटियों में से कुछ ऐसी हैं जो हिंदुओं को अध्यात्मवादियों और आदिवासियों से पृथक करती हैं। शेष ऐसी हैं जो उन्हें अछूतों से पृथक करती हैं। अछूतों को हिंदुओं से पृथक करने वाली क्रम संख्या 2, 5, 6, 7 तथा 10 है। हमारा संबंध विशेष रूप से उन्हीं से है।

स्पष्टता के लिए अच्छा है कि हम इन कसौटियों को हिस्सों में बांट लें, और उन पर पृथक-पृथक विचार करें। इस अध्याय में केवल क्रम सं. 2, 5 तथा 6 पर विचार होगा। सं. 2, 5, 6 कसौटियों के अंतर्गत जो प्रश्न हैं उनके जनगणना आयुक्त को जो उत्तर मिले हैं उनसे प्रकट होता है कि (1) अछूत किसी ब्राह्मण से मंत्र नहीं लेते (2) अच्छे ब्राह्मण अछूतों का संस्कार नहीं करते और (3) अछूतों के अपने में से पैदा किए हुए निजी पुजारी होते हैं। सभी प्रांतों के

  1. देखें भारत की जनगणना (1911), भाग 1, पृष्ठ 117