5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 100

पाकिस्तान और सांप्रदायिक शांति

91

बनाए रखने की प्रणाली से बचा नहीं जा सकता। इसलिए पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत, सिंध और बंगाल के मुस्ल्मि-बहुल प्रांतों में मुसलमानों के संवैधानिक बहुमत के बारे में हिंदुओं द्वारा की गई आपत्ति में कोई बहुत दम नहीं है। कारण, जिन प्रांतों में हिंदू बहुमत में हैं, और मुस्लिम अल्पमत में, हिंदुओं को मुसलमानों के मुकाबले वैधानिक बहुमत मिला है। जो भी हो, स्थिति में दोनों को समानता मिली हुई है और इसलिए शिकायत का कोई कारण नहीं है।

इसका यह मतलब नहीं कि चूंकि हिंदुओं की आपत्ति में कोई सार नहीं है, इसलिए कम्यूनल एवार्ड के विरोध करने को कोई ठीक कारण ही नहीं बनता। कम्यूनल एवार्ड पर आपत्ति के कई कारण हैं, यद्यपि ऐसा लगता है कि हिंदुओं ने उन्हें एवार्ड पर आक्रमण करने का आधार नहीं बताया।

इस आपत्ति को निम्नलिखित रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है। हिंदू प्रांतों के मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने पृथक निर्वाचक-मंडल बनाने पर जोर दिया। कम्यूनल एवार्ड से उन्हें इस मुद्दे के बारे में अधिकार मिल जाता है। और स्थिति यही बन जाती है जब यह याद किया जाए कि क्या रुख अपनाया गया अर्थात् मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बिना उनकी सहमति के पृथक निर्वाचक-मंडल से वंचित नहीं किया जा सकता और बहुसंख्यक हिंदू को मुसलमानों के इस संकल्प को मानना ही होगा। मुस्लिम प्रांतों में अल्पसंख्यक हिंदुओं ने जोर दिया कि संयुक्त निर्वाचक-मंडल होने चाहिएं। उनके इस दावे को स्वीकार करने की जगह उन पर पृथक निर्वाचक-मंडल थोप दिया गया, जिस पर उन्हें आपत्ति थी। यदि हिंदू प्रांतों में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया गया तो प्रश्न उठता है कि मुस्लिम प्रांतों में हिंदू अल्पसंख्यकों को निर्वाचक-मंडल के बारे में आत्मनिर्णय का अधिकार क्यों नहीं दिया गया? इस प्रश्न का उत्तर क्या है? और यदि इसका कोई उत्तर नहीं, तो ब्रिटिश सरकार के कम्यूनल एवार्ड में निस्संदेह घोर पक्षपात किया गया है और उसे दूर किया जाना चिहए।

इसका यह कोई जवाब नहीं है कि पृथक निर्वाचक-मंडल के आधार पर जिन प्रांतों में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, वहां हिंदुओं को वैधानिक बहुमत प्राप्त है।ऽ मामूली-सी जांच से ही पता चल जाएगा कि इन दो मामलों में कोई समानता नहीं है। हिंदू प्रांतों में हिंदुओं के बहुमत के लिए पृथक निर्वाचक मंडल उनकी मर्जी से नहीं बनाए गए। यह तो मुस्लिम अल्पमत के संकल्प के फलस्वरूप बने, जिन्होंने अपने लिए पृथक

ऽ शायद हिंदू निर्वाचक-मंडल की बात करना पूरी तरह ठीक नहीं है। यह निर्वाचक-मंडल आम निर्वाचक-मंडल

है, जिसमें वे सब लोग शामिल हैं जो पृथक निर्वाचक-मंडल में नहीं आते। परंतु चूंकि आम निर्वाचक-मंडल

में हिंदू बहुमत में हैं, इसलिए इसे हिंदू निर्वाचक-मंडल कहा जाता है।