92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
निर्वाचक-मंडल का दावा किया था। एक विशेष प्रकार की परिस्थितियों में अल्पसंख्यक सोच सकते हैं कि उनके आत्मसंरक्षण के लिए पृथक निर्वाचक-मंडल बनाना बेहतर तरीका है और स्वयं अपनी मर्जी और अपने कृत्यों से पृथक निर्वाचक-मंडल बनाकर विरोधी पार्टी को वैधानिक बहुमत देने से उन्हें कोई डर या खतरा नहीं है। एक दूसर अल्पमत या अलग प्रकार की परिस्थितियों में वही अल्पमत अपनी कार्रवाई से और अपने ही विरोध में पृथक निर्वाचक-मंडल द्वारा वैधानिक बहुमत को पसंद नहीं भी कर सकता है और आत्मसंरक्षण के लिए पृथक निर्वाचक-मंडल की जगह संयुक्त निर्वाचक-मंडल को बेहतर तरीका समझकर तरजीह दे सकता है। स्पष्टतया अल्पसंख्यकों के फैसले को प्रभावित करेन वाला मार्गदर्शक सिद्धांत यह होगा - क्या बहुसंख्यक अपनी बहुसंख्या का उपयोग सांप्रदायिक ढंग से और सांप्रदायिक उद्देश्यों से करेंगे? यदि वह निश्चित रूप से अनुभव करे कि बहुसंख्यक संप्रदाय अपने बहुमत का उपयोग सांप्रदायिक कार्यों के लिए करेगा, तो वह संयुक्त निर्वाचक-मंडल को चुनेगा, क्योंकि उसके पास यही एकमात्र तरीका है जिसे अपनाकर वैधानिक बहुमत की कट्टठ्ठरता को दूर करने के लिए विधान-मंडल में बहुसंख्यक संप्रदाय के प्रतिनिधियों के चुनावों को प्रभावित करने की आशा की जा सकती है। दूसरी ओर, हो सकता है कि बहुसंख्यक संप्रदाय सांप्रदायिकता को पुख्ता करने वाली शक्ति न हो जिसकी बदौलत ही वह अपने बहुमत का उपयोग सांप्रदायिक उद्देश्यों के लिए करे और ऐसी परिस्थिति में अल्पसंख्यक संप्रदाय को वैधानिक बहुमत से कोई डर न रहे और वह अपने पृथक निर्वाचक-मंडल की मांग करे। यदि निश्चित शब्दों में कहा जाए, तो मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने पृथक निर्वाचक-मंडल को इसलिए चुना है, कि पृथक निर्वाचक-मंडल और हिंदुओं के वैधानिक बहुमत से उन्हें कोई खतरा नहीं, क्योंकि वे इस बात से आश्वस्त हैं कि जाति और वर्ण संबंधी मतभेदों के कारण हिंदू मुसलमानों के विरुद्ध अपने बहुसंख्यक होने का उपयोग नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर, मुस्ल्मि प्रांतों में हिंदू अल्पसंख्यकों को इस बारे में कोई संदेह नहीं कि अपनी सामाजिक एकता और सुदृढ़ता के कारण मुसलमान अपने बहुमत का उपयोग एक कट्टठ्ठर मुस्लिम सरकार बनाने के लिए करेंगे, जो लॉर्ड सेलिसबरी द्वारा आयरलैंड के लिए होम रूल के विकल्प के रूप में बनाई गई योजना जैसी होगी। अंतर केवल यह होगा कि लॉर्ड सेलिसबरी की कट्टठ्ठर सरकार केवल तीस वर्ष तक रहनी थी, जबकि मुसलमानों की कट्टठ्ठर सरकार तब तक बनी रहेगी जब तक कम्यूनल एवार्ड लागू रहेगा। इसलिए दोनों परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। पृथक निर्वाचक-मंडल पर आधारित हिंदुओं का वैधानिक बहुमत मुस्लिमों द्वारा किए गए चुनाव के परिणामस्वरूप बना है, पृथक निर्वाचक-मंडल पर आधारित नहीं है। एक मामले में हिंदू, संप्रदाय के बहुमत से बनी मुस्लिम अल्पसंख्यक सरकार मुस्लिम अल्पसंख्यंकों की