5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 102

पाकिस्तान और सांप्रदायिक शांति

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सहमति से बनी है। दूसरे मामले में, मुस्लिम बहुमत द्वारा बनाई गई हिंदू अल्पसंख्यक सरकार हिंदू अल्पसंख्यकों की सहमति से नहीं बनी, बल्कि वह ब्रिटिश सरकार की ताकत से थोपी गई है।

कम्यूनल एवार्ड पर किए गए इस विचार-विमर्श के निष्कर्षस्वरूप कहा जा सकता है कि सांप्रदायिक समस्या के ‘कम व्यापक’ अभिप्राय या पहलू का हल यह हो सकता है कि एवार्ड में इस कारण कोई पक्षपात न हो। इसमें हिंदू प्रांतों में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को वज़न दिया गया है। अतः इससे मुस्लिम प्रांतों में हिंदू अल्पसंख्यकों को भी वज़न मिलता है। इसी तरह यह भी कहा जा सकता है कि इस एवार्ड में कोई पक्षपात नहीं है क्योंकि यह मुस्लिम प्रांतों में मुस्लिमों को वैधानिक बहुमत प्रदान करता है, जहां वे बहुसंख्यक हैं। यदि मुस्लिम स्थानों की संख्या पर वैधानिक सीमा लगाई गई है तो यह हिंदुओं को भी हिंदू बहुमत वाले प्रांतों में वैधानिक बहुमत प्रदान करता है। परंतु निर्वाचक-मंडलों के संदर्भ में, एवार्ड के बारे में यह नहीं कहा जा सकता। कम्यूनल एवार्ड इस लिहाज से अवश्य अन्यायपूर्ण है कि निर्वाचक-मंडलों के मामलों में हिंदुओं और मुसलमानों से एक-सा बर्ताव नहीं किया गया। यह हिंदू प्रांतों में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निर्वाचक-मंडलों के बारे में आत्मनिर्णय का अधिकार देता है, जबकि मुस्लिम प्रांतों में हिंदू अल्पसंख्यकों को यह अधिकार नहीं दिया गया। हिंदू प्रांतों में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद का निर्वाचक-मंडल चुनने का अधिकार दिया गया है और हिंदू बहुमत को कुछ बोलने नहीं दिया गया। परंतु मुस्लिम प्रांतों में मुस्लिम बहुमत को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपनी पसंद का निर्वाचक-मंडल चुने और हिंदू अल्पसंख्यकों को कुछ कहने नहीं दिया गया। इस तरह मुस्लिम प्रांतों में मुस्लिमों को वैधानिक बहुमत भी दिया गया है और पृथक निर्वाचक-मंडल भी। परन्तु हिंदू अल्पसंख्यकों पर मुस्ल्मि शासन थोपा गया है, जिसे न तो वे बदल सकते हैं और न ही प्रभावित कर सकते हैं।

कम्युनल एवार्ड में यही मूलभूत त्रुटि है_ और स्वीकार करना चाहिए कि यह बहुत बड़ी त्रुटि है। कारण, यह सब ऐसे राजनीतिक सिद्धांतों के विपरीत है जिन्हें अब स्वयंसिद्ध माना जाता है। पहला यह कि किसी पर इतना विश्वास न करो कि उसे असीमित राजनीतिक सत्ता मिल जाए। ठीक ही कहा गया हैः

फ्यदि किसी राज्य या देश में कुछ लोगों के संगठन के पास असीमित

राजनीतिक सत्ता हो तो, जिन पर वे शासन करते हैं, वे कभी स्वतंत्र नहीं

हो सकते। इतिहास के अध्ययन से यह निश्चित सबक मिला है कि जिनके

हाथ में अनियंत्रित सत्ता आती है, वह उनके हाथों में अनिश्चित रूप से

विषैली बन जाती है। वे सदा अपने सिद्धांत उन पर थोपने का प्रयत्न करते