पाकिस्तान और सांप्रदायिक शांति
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बनाए गए हैं कि वैधानिक रूप से बनाया गया बहुमत अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर सके। ये दो बुराइयां हैं, जो मिलकर सांप्रदायिक समस्या पैदा करती हैं।
इस सांप्रदायिक समस्या के लिए हिंदू मुस्लिमों को और मुस्लिम हिंदुओं को दोषी ठहराते हैं। हिंदू लोग मुस्लिमों पर दुराग्रह का दोष लगाते हैं, मुस्लिम हिंदुओं पर नीचता का आरोप लगाते हैं, तथापि दोनों यह भूल जाते हैं कि सांप्रदायिक समस्या पैदा होने का यह कारण नहीं कि मुस्लिम अपनी मांगें बहुत बढ़ा-चढ़ाकर, बहुत गुस्ताखी से रखते रहे हैं और हिंदू रियायतें देते समय बहुत नीचता और अनिच्छा व द्वेष-भावना रखते हैं। यह समस्या तब तक बनी रहेगी जब तक एक शत्रुतापूर्ण बहुमत का शत्रुतापूर्ण अल्पमत सामना करता रहेगा। पृथक बनाम संयुक्त निर्वाचक-मंडल संबंधी विवाद, जनसंख्या का अनुपात बनाम वजन संबंधी विवाद में सब उस परिस्थिति में बने रहेंगे जहां अल्पसंख्यक संप्रदाय बहुसंख्यक संप्रदाय से टक्कर लेने को तैयार
खड़ा है। सांप्रदायिक समस्या का सर्वोत्तम हल यह है कि अल्पसंख्यक समुदाय और बहुसंख्यक समुदाय, दोनों ही एक-दूसरे से टक्कर लेने के लिए एक ही सरकार, एक फौलादी ढांचे, में न बने रहें।
पाकिस्तान सांप्रदायिक समस्या के हल के कितने निकट पहुंचता है?
इस प्रश्न का उत्तर बिलकुल स्पष्ट है। यदि पाकिस्तान की स्कीम में उत्तर-पश्चिम के प्रांतों और बंगाल की वर्तमान सीमाएं बनी रहें, तो सांप्रदायिक समस्या के मूल में जो बुराइयां हैं, वे दूर नहीं होतीं। इसमें वे सारे तत्व मौजूद हैं जिनके कारण् यह समस्या पैदा हुई, अर्थात् बहुसंख्यकों के मुकाबले अल्पसंख्यकों को खड़ा कर देना। वर्तमान स्थिति की सबसे विकट बुराइयां हैं हिंदू अल्पमत पर मुस्लिम बहुमत का शासन और मुस्लिम अल्पमत पर हिंदू बहुमत का शासन। यदि पाकिस्तान वाले प्रांतों की वर्तमान सीमाएं बनी रहीं तो पाकिस्तान में भी यह बुराई जारी रहेगी। इसके अतिरिक्त, जिस बुराई से सांप्रदायिक समस्या अपने व्यापक अभिप्राय में प्रकट होती है, वह न केवल बनी रहेगी बल्कि और भी अधिक जटिल हो जाएगी। वर्तमान प्रणाली के अंतर्गत, सांप्रदायिक प्रांतों की अपने बंधकों को परेशान करने की शक्ति प्रांतीय सरकारों पर केंद्रीय सरकार की सत्ता के कारण सीमित है। आजकल तो हिंदू एक ऐसी केंद्रीय सरकार के अंतर्गत आते हैं जिसकी हिंदू संरचना है और जिसके हाथ में ऐसी सत्ता है जो हिंदुओं के संरक्षण के लिए हस्तक्षेप कर सकती है। परंतु जब पाकिस्तान मुस्लिम देश बन जाएगा और आंतरिक और बाह्य मामलों पर उसकी पूर्ण प्रभुता होगी, तो वह केंद्रीय सरकार के नियंत्रण से बाहर होगा। हिंदू अल्पसंख्यकों के पास तब तक ऐसा रास्ता नहीं रहेगा कि वे किसी ऐसी बाहरी सत्ता के पास जा सकें जिसके पास उसे दबाकर रखने की शक्ति हो और जो (हिंदुओं