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पाकिस्तान और सांप्रदायिक शांति

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इसलिए यह प्रश्न है सीमांकन का, जिसे इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता हैः क्या पाकिस्तान की सीमाएं इस तरह निर्धारित की जा सकती हैं कि पाकिस्तान बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक संप्रदायों के मिले-जुले देश की जगह (जिसमें उल्लिखित सभी बुराइयां होती हैं) एक सजातीय देश बन जाए, जिसमें केवल एकजातीय संप्रदाय अर्थात् मुसलमान ही रहें? इसका जवाब यह है कि लीग की योजनानुसार जो क्षेत्र प्रभावित होगा, उसके बड़े भाग को सीमाओं में हेरफेर करके उसे सजातीय बताया जा सकता है, जबकि शेष क्षेत्र में जनसंख्या में अदला-बदली करके सजातीयता लाई जा सकती है।

इस संदर्भ में मैं आपका ध्यान परिशिष्ट V, X और XI की ओर आकृष्ट करना चाहूंगा, जिनमें प्रभावित क्षेत्रों में जनसंख्या-वितरण के आंकड़े दिए गए हैं। ऐसे नक्शे भी दिए गए हैं, जिनमें दिखाया गया है कि सीमाओं में फेरबदल करके किस तरह सजातीय मुस्ल्मि राज्य बनाए जा सकते हैं। पंजाब के मामले में दो बातों पर ध्यान देना चाहिएः

(1) कई जिले ऐसे हैं जिनमें मुसलमान बहुसंख्यक हैं। कुछ जिले ऐसे हैं जिनमें

हिंदू बहुसंख्यक हैं। ऐसे जिले बहुत कम हैं जिनमें दोनों संप्रदाय लगभग

बराबर संख्या में हों_ और

(2) मुस्लिम बहुसंख्या वाले जिले और हिंदू बहुसंख्या वाले जिले छितरे हुए

नहीं हैं। ये दोनों प्रकार के जिले दो अलग-अलग क्षेत्रों में हैं।

पूर्वी पाकिस्तान बनाने के लिए हमें बंगाल और आसाम दोनों प्रांतों में जनसंख्या के वितरण को ध्यान में रखना पड़ेगा। जनसंख्या के आंकड़ों की जांच करने से पता चलता है किः

(1) बंगाल में कुछ जिले ऐसे हैं जिनमें मुस्लिम बहुसंख्या में हैं। अन्य जिलों

में हिंदू बहुसंख्या में हैं।

(2) आसाम में भी कुछ जिलों में मुस्लिम बहुसंख्या में हैं और कुछ जिलों में

हिंदू बहुसंख्या में हैं।

(3) मुस्लिम बहुसंख्या और हिंदू बहुसंख्या वाले जिले छितरे हुए नहीं हैं। वे

अलग-अलग क्षेत्रों में हैं।

(4) बंगाल और आसाम के जिन जिलों में मुस्लिम बहुसंख्या में हैं, वे साथ-साथ

लगे हुए हैं।

इन तथ्यों के रहते, पंजाब, बंगाल और आसाम के प्रांतों में सीमांकन इस तरह से किया जा सकता है कि हिंदू बहुसंख्या वाले क्षेत्रों को अलग कर दिया जाए और