6. पाकिस्तान और सांप्रदायिक शांति - Page 109

100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मुस्लिम बहुसंख्या वाले सजातीय देश का निर्माण किया जा सके। परिशिष्ट में दिए गए नक्शों से पता चलता है कि ऐसा करना संभव है।

उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और सिंध की स्थिति अपेक्षाकृत कठिन है। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और सिंध की स्थिति को VI से IX में दिए गए आंकड़ों से समझा जा सकता है। इन परिशिष्टों से पता चलता है कि उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और सिंध में कोई ऐसे जिले नहीं हैं, जहां हिंदू केंद्रित हों। इन दोनों प्रांतों के सभी जिलों में हिंदू रहते हैं, पर वे थोड़ी या महत्वहीन संख्या में हैं। इन परिशिष्टों से बिना किसी संदेह के यह भी स्पष्ट हो जाता है कि उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और सिंध के विभिन्न जिलों में हिंदू अधिकांशतया शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। सिंध में अधिकांश शहरों में हिंदुओं की संख्या मुसलमानों से अधिक है, जबकि गांवों में मुस्लिम हिंदुओं से अधिक हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत में मुस्लिम आबादी शहरों और गांवों दोनों में हिंदुओं से अधिक है।

इस तरह उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और सिंध का मामला पंजाब और बंगाल से बिल्कुल अलग है। पंजाब और बंगाल में चूंकि हिंदू और मुसलमान अलग-अलग क्षेत्रों में स्वाभाविक तौर से अलग-अलग रहते हैं, इसलिए वहां केवल सीमाओं में फेरबदल करके सजातीय राज्य बनाना संभव है और वहां जनता की अदला-बदली बहुत कम पैमाने पर करनी पड़ेगी। परंतु उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और सिंध में चूंकि हिंदू सब जगह बिखरे हुए हैं, इसलिए केवल सीमाओं में फेरबदल करके सजातीय राज्य नहीं बनाए जा सकते। इस समस्या का केवल एक ही समाधान है, और वह है जनता की अदला-बदली।

कुछ लोग जनता की अला-बदली के विचार का उपहास करते हैं। परंतु उपहास करने वाले लोग यह नहीं समझते कि अल्पसंख्यकों की समस्या के कारण कितनी जटिलताएं उठ खड़ी होती हैं और उनकी रक्षा के लिए किए जाने वाले सभी प्रयास किस तरह असफल हो जाते हैं। युद्धोत्तर बने राज्यों और यूरोप के पुराने राज्यों में भी जहां अल्पसंख्यकों की समस्या थी, संविधानों में यह मानकर प्रावधान किए गए कि ऐसे संरक्षण उनकी रक्षा के लिए पर्याप्त होंगे। इसलिए सभी नए राज्यों के बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों वाले संविधानों में उनके मौलिक अधिकारों और संरक्षणों की एक लंबी सूची लगा दी गई जिससे यह सुनिश्चित किया जाना था कि बहुसंख्यक उनका उल्लंघन नहीं करेंगे। परन्तु अनुभव क्या बताता है? अनुभव से पता चला कि संरक्षणों से अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं हुई। अनुभव से यह भी पता चला कि अल्पसंख्यकों के विरुद्ध एक कू्ररतापूर्ण युद्ध छेड़ देने से भी समस्या हल नहीं हुई। तब ये राज्य इस बात पर सहमत हो गए कि समस्या का सर्वोत्तम हल यही है कि अपनी-अपनी सीमाओं में ही अपने से भिन्न अल्पसंख्यकों की अदला-बदली कर