पाकिस्तान और सांप्रदायिक शांति
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हद तक सुलझेगी। यह बहुत उचित प्रश्न है, और इस पर विचार करना चाहिए। यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि पाकिस्तान बनने से हिंदुस्तान सांप्रदायिक समस्या से मुक्त नहीं हो जाएगा। सीमाओं का पुनर्निर्धारण करके पाकिस्तान को तो एक सजातीय देश बनाया जा सकता है, परंतु हिंदुस्तान तो एक मिश्रित देश बना ही रहेगा। मुसलमान समूचे हिंदुस्तान में छितरे हुए हैं - यद्यपि वे मुख्यतः शहरों और कस्बों में केंद्रित हैं। चाहे किसी भी ढंग से सीमांकन की कोशिश की जाए, उसे सजातीय देश नहीं बनाया जा सकता। हिंदुस्तान को सजातीय देश बनाने का एकमात्र तरीका है जनसंख्या की अदला-बदली की व्यवस्था करना। यह अवश्य विचार कर लेना चाहिए कि जब तक ऐसा नहीं किया जाएगा, हिंदुस्तान में बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक की समस्या और हिंदुस्तान की राजनीति में असंगति पहले की तरह बनी ही रहेगी।
अगर यह मानकर चला जाए कि पाकिस्तान बनने से हिंदुस्तान में सांप्रदायिक समस्या हल होने वाली नहीं है, तो क्या इसी के चलते हिंदू को पाकिस्तान के लिए मना कर देना चाहिए? हिंदू जल्दबाजी में किसी ऐसे निष्कर्ष पर पहुंचें उससे पहले उन्हें पाकिस्तान बनने के निम्नलिखित प्रभावों पर विचार कर लेना चाहिए।
पहले यह देखिए कि पाकिस्तान बनने से सांप्रदायिक समस्या के परिमाण पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उसे सर्वोत्तम ढंग से आंकने का तरीका यह है कि पाकिस्तान और हिंदुस्तान में मुस्लिमों की संख्या कितनी हो जाएगीः
| ikfdLrku esa eqfLye vkcknh | fganqLrku esa eqfLye vkcknh |
|---|---|
| 1- iatkc 13]332]460 2- mÙkj&if'peh lhek izkar 2]227]303 3- flaèk 2]830]800 4- cywfpLrku 405]309 5- iwohZ caxky (d) iwohZ caxky 27]497]624 ([k) flygV 1]603]805 ;ksx |
1- fczfV'k Hkkjr esa oqQy eqfLye vkcknh (cekZ vkSj vnu dks NksM+dj) 66]442]766 2- ikfdLrku vkSj iwohZ caxky esa vkus okyh eqfLye vkcknh 47]897]301 3- fczfV'k Hkkjr esa 'ks"k eqfLye vkcknh 18]545]465 |
ये आंकड़े क्या दर्शाते हैं?