110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
एक ही था। 1915 में सिंध में कोई प्रतिनिधि सरकार नहीं थी, परंतु यदि वहां कोई सरकार होती तो वह निस्संदेह मुस्लिम सरकार होती। हिंदुओं ने तब अलग होने का समर्थन इसलिए किया था कि मुस्लिम सरकार के अभाव में सरकारी नौकरियां उन्हें अधिक मात्रा में मिल सकेंगी। 1929 में उन्होंने सिंध को अलग करने का विरोध इसलिए किया क्योंकि वे यह जानते थे कि अलग सिंध मुस्लिम सरकार के अंतर्गत होगा, जो उनके इस एकाधिकार को तोड़ देगी और उनकी जगह मुस्लिम उम्मीदवारों को देगी। बंगाली हिंदुओं द्वारा बंगाल-विभाजन का विरोध करना ऊंची जातियों के हिंदुओं के इसी गुण का एक और उदाहरण है। समूचा बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम, यहां तक कि संयुक्त प्रांत भी बंगाली हिंदुओं के प्रभुत्व क्षेत्र बने हुए थे। उन्होंने उन सभी प्रांतों में सरकारी नौकरियों पर कब्जा जमा रखा था। बंगाल के विभाजन का अर्थ होता उनके इस प्रभुत्व-क्षेत्र में कमी होना। इसका अर्थ होता बंगाली मुसलमान को जगह देने के लिए पूर्वी बंगाल से बंगाली हिंदू को निकाला जाना, क्योंकि तब तक बंगाली मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में कोई स्थान प्राप्त नहीं था। बंगाली हिंदुओं द्वारा बंगाल-विभाजन का विरोध मुख्यतः इस कारण था कि वे नहीं चाहते थे कि बंगाल के मुसलमानों को पूर्वी बंगाल में उनका उचित स्थान मिले। उस समय बंगाली हिंदुओं ने सपने में भी यह नहीं सोचा था कि एक तरफ वे विभाजन का विरोध करके और साथ ही स्वराज की मांग करके मुसलमानों को पूर्वी बंगाल और पश्चिमी बंगाल दोनों का शासक बनाने का रास्ता तैयार कर रहे थे।
ऐसे विचार मन में इस डर से आते हैं कि ऊंची जातियों के हिंदू अपने वंशानुगत गुणों के कारण पाकिस्तान का विरोध अन्य किसी कारण से नहीं, बल्कि अपने रोजगार की संभावनाएं सीमित होने के कारण ही करेंगे। पाकिस्तान बनने की राह में आने वाले जो भी कारण बताए जाएं, इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इसका एक कारण ऊंची जाति के हिंदुओं का स्वार्थ है।
पंजाब और बंगाल के हिंदुओं के सामने दो विकल्प हैं, जिनका उन्हें सही ढंग से सामना करना होगा। पंजाब में मुस्लिमों की संख्या 1,33,32,460 है, जबकि सिखों और अन्य लोगों को मिलाकर हिंदुओं की संख्या 1,13,92,722 है। दोनों में अंतर केवल 19,39,728 का है। इसका मतलब यह हुआ कि पंजाब में मुसलमानों का बहुमत केवल 8 प्रतिशत का है। अब इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए क्या यह ठीक है कि पंजाब की एकता बनाए रखी जाए और 54 प्रतिशत मुसलमानों को 46 प्रतिशत हिंदुओं पर शासन करने दिया जाए या फिर नए सिरे से सीमांकन कर अलग-अलग कौमी रियासतें बना दी जाएं और इस तरह पूरे हिंदुओं को मुस्लिम शासन के अत्याचारों से बचाया जाए?