118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
वह है राजनीति! यह बात तब शुरू हुई जब श्री गांधी ने राजनीति में एक राजनीतिक नेता के रूप में प्रवेश किया। यही नई सेवा या काम गांधीवादी राजनीति को बढ़ावा देता है। परंतु यहां भी उसका कारण राजनीति से प्यार नहीं है। कारण है सार्वजनिक कामों से भी अपने लिए मुनाफा कमाना। अब इस बात की क्या उम्मीद हो सकती है कि ऐसे लोग अफगानों और सीमावर्ती क्षेत्रों के कबायलियों में हिंदू धर्म के प्रचार जैसे व्यर्थ के कामों के लिए धन खर्चेंगे?
तीसरे, अफगानिस्तान में धर्म-परिवर्तन के लिए उपलब्ध सुविधाओं का प्रश्न उठता है। स्पष्ट है कि लाला हरदयाल यह सोचते थे कि तुर्की की तरह अफगानिस्तान में भी बिना किसी डर के वह इस बात का प्रचार कर सकेंगे कि कुरान गलत है या पुराना पड़ गया है। लाला हरदयाल की इस राजनीतिक खासियत के प्रकाशन से केवल एक वर्ष पूर्व, 1924 में, देवदूत माने जाने वाले कादियान के मिर्जा गुलाम अहमद के एक अनुयायी नियामतुल्ला को, जो अपने आपको एक मसीहा और महदी तथा एक किस्म का पैगंबर या नबी कहता था, काबुल में वहां की सर्वोच्च धार्मिक अदालत ने पत्थर मार-मारकर मार डालने का आदेश दिया।ऽ एक समाचारपत्र ‘खिलाफत’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस आदमी का कसूर इतना था कि वह ऐसे विचारों को मानता था और उनका प्रचार करता था जो इस्लाम और शरियत के अनुरूप नहीं थे। इसी समाचारपत्र के अनुसार पत्थर मारकर मौत की यह सजा पहली शरियत अदालत, केंद्रीय अपीलीय अदालत और न्याय मंत्रालय की निर्णायक अपीलीय कमेटी के उलेमाओं और धर्म-गुरुओं की सहमति से दी गई थी। इन कठिनाइयों को देखते हुए इस योजना को बर्बर अवधारणा कहा जा सकता है, और यह बहुत ही विनाशकारी सिद्ध होगी। यह बहुत दुस्साहसपूर्ण है, और शायद पंजाब के कुछ सिरफिरे आर्यसमाजियों के अतिरिक्त किसी भी समझदार आदमी को पसंद नहीं आएगी।
II
इस संबंध में हिंदू महासभा की जो विचारधारा है उसे उसके अध्यक्ष श्री बी.डी. सावरकर ने सभा के वार्षिक अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय भाषण में स्पष्ट किया। उनकी व्याख्या के अनुसार, हिंदू महासभा पाकिस्तान के विरुद्ध है और वह उसका सभी साधनों से विरोध करेगी। हमें यह नहीं पता कि साधन कौन से होंगे। यदि साधन बल-प्रयोग, दबाव और प्रतिरोध है, तो ये केवल नकारात्मक विकल्प सिद्ध होंगे और केवल हिंदू महासभा और श्री सावरकर ही बता सकते हैं कि ये कितने सफल होंगे।
ऽ टाइम्स ऑफ इंडिया में ‘थू्र इंडियन आइज़’ शीर्षक के अंतर्गत 27.11.24 को प्रकाशित।