7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 137

128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

और क्योंकि श्री सावरकर यह चाहते हैं कि उनके स्वराज पर हिंदू राज की छाप रहे, इसलिए वे उसे हिंदुस्तान नाम देना चाहते हैं।

मि. सावरकर द्वारा पोषित यह ढांचा कुछ उन प्रस्तावों पर आधारित है, जिन्हें वे आधारभूत मानते हैं।

पहला तो यह कि हिंदू स्वयं में एक राष्ट्र हैं। इस प्रस्ताव की व्याख्या वह बड़े विस्तार से और बड़े जोरदार शब्दों में करते हैं। श्री सावरकर का कथन निम्नलिखित हैः

फ्नागपुर अधिवेशन के अध्यक्षीय भाषण के अवसर पर आधुनिक राजनीति

के इतिहास में मैंने पहली बार बड़े जोरदार शब्दों में यह कहा था कि

कांग्रेस की समूची विचारधारा शुरू से ही इस गलत धारणा पर आधारित

है कि केवल प्रादेशिक एकता और एक जगह रहना एकमात्र ऐसा कारक

है जिससे राष्ट्र का निर्माण हो जाता है, होना चाहिए और है। प्रादेशिक

राष्ट्रीयता की इस धारणा को तब से स्वयं यूरोप में भी भारी झटका लगा

है, जहां से उठाकर यह भारत में लाई गई थी और वर्तमान युद्ध ने इस

गलत धारणा का पूरी तरह खंडन करके मेरे इस दावे को सही सिद्ध कर

दिया है। जितने भी देश केवल प्रादेशिक एकता के आधार पर बनाए गए

थे, और जहां उन्हें राष्ट्र के रूप में बांधकर रखने के पीछे और कोई

बात नहीं थी, वे सब नाश के द्वार तक चले गए हैं और ताश के पत्तों

के महत्व की तरह गिर गए हैं। पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया ऐसे प्रयासों

के विरुद्ध कड़ी चेतावनी देते रहेंगे कि जहां किसी राष्ट्र को सांस्कृतिक,

जातिगत या ऐतिहासिक साम्यताओं के सीमेंट से मजबूत न बनाया जा

सके, जिसके फलस्वरूप उनमें एक - राष्ट्र की तरह रहने की इच्छा पैदा

हो, तो एक-दूसरे से कतई भिन्न लोगों का प्रादेशिक राष्ट्रीयता के आधार

पर बनाया गया गड़बड़ राष्ट्र केवल खिसकती हुई बालू पर बनाया गया

घर होगा। संधियों के आधार पर बनाए गए ये राष्ट्र पहला मौका मिलते

ही बिखर गए। उनका जर्मन भाग जर्मनी को मिल गया, रूसी भाग रूस

को, चेक भाग चेक लोगों को और पोल भाग पोल लोगों के पास चला

गया। सांस्कृतिक, भाषागत, ऐतिहासिक और अन्य सहज नैसर्गिक साम्यताएं

क्षेत्रीयता से अधिक मजबूत सिद्ध हुईं। यूरोप में गत तीन या चार सदियों

में केवल वही राष्ट्र अपनी राष्ट्रीयता, एकता और पहचान बरकरार रख

सके हैं, जिन्होंने अपनी प्रादेशिक एकता के साथ-साथ, और कई बार

तो उसके बिना भी, अपने यहां जातिगत, भाषागत, सांस्कृतिक और ऐसी