पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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अन्य सहज नैसर्गिक साम्यताओं का विकास किया है जिसके फलस्वरूप वे समजातीय राष्ट्रीय इकाइयां बन सकें, जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पुर्तगाल आदि।
इनमें से किसी एक या सभी कसौटियों पर परखने से जो तत्व अलग-अगल और सामूहिक समजातीय और एकीकृत राष्ट्र बनाते हैं, हम समझते हैं कि हिंदुस्तान में हम हिंदू ही अपने आप में एक स्थाई राष्ट्र हैं। हमारी न केवल एक ही पितृभूमि है, प्रादेशिक एकता है, बल्कि एक और बात तो विश्व-भर में दुर्लभ है, और वह हमारी पुण्यभूमि भी है, जिसे हम अपनी सांझी ‘पितृभूमि’ कहते हैं। यह भारत भूमि, यह हिंदुस्तान, हमारी ‘पितृभू’ और ‘पुण्यभू’ दोनों हैं। इस तरह हमारी देशभक्ति दोहरे तौर पर निश्चित हो जाती है। फिर हम में कई साम्यताएं हैं - सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, भाषायी और जातीय - इन सबका असंख्य शताब्दियों से जो संबंध और मेल-मिलाप चला आ रहा है, उससे हम एक समजातीय और सहज नैसर्गिक राष्ट्र बन गए हैं, और सबसे बढ़कर हम सब में सामूहिक रूप से और समान रूप से राष्ट्रीय जीवन बिताने की इच्छा पैदा हो गई है। हिंदू कोई संधि से बने हुए राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि एक सहज नैसर्गिक राष्ट्र हैं।
एक और प्रासंगिक बात बताने की भी जरूरत है, क्योंकि विशेषकर इससे हमारे कांग्रेसी हिंदू भाई भ्रम में पड़ जाते हैं। जिस समजातीयता से लोग एक राष्ट्र बन जाते हैं, उसका यह अर्थ नहीं होता कि सभी आंतरिक मतभेद - धार्मिक, जातिगत या भाषागत या विभिन्न वर्गों और संप्रदायों में - बिल्कुल नहीं रहते। इसका अर्थ केवल यह है कि अन्य लोगों से वे अपेक्षाकृत अधिक भिन्न होते है, और स्वयं राष्ट्रीय इकाई के अपने लोगों से अपेक्षाकृत कम भिन्न। आज के सबसे अधिक एकात्म राष्ट्र जैसे इंग्लैंड या फ्रांस भी, धार्मिक, भाषागत, सांस्कृतिक, जातिगत या अन्य मतभेदों, वर्गों या संप्रदायों से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं और उनमें भी विद्वेष की भावना होती है। राष्ट्रीय समजातीयता का अर्थ लोगों के उस एकरूप होने से है जो कुल मिलाकर अन्य लोगों के मुकाबले अधिक होता है।
हम हिंदू आपस में हजार अंतरों के बावजूद ऐसे धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, जातिगत, भाषागत तथा अन्य क्षेत्रों में एक दूसरे से इतनी