पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
131
एक तो यह कि इस बात को बहुत जोर देकर कहा गया है कि हिंदू स्वयं में ही एक राष्ट्र हैं। तथापि इसका यह भी अर्थ निकलता है कि मुस्लिम अपने आप में एक अलग राष्ट्र हैं। श्री सावरकर का यह विचार उनकी ठोस विचारधारा है, जिसका कोई और अर्थ नहीं निकाला जा सकता। वह इसे बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहते हैं और जितना भी जोर दे सकते हैं, उतना देकर कहते हैं। 1937 में अहमदाबाद में आयोजित हिंदू महासभा के अधिवेशन में बोलते हुए उन्होंने कहा थाः
फ्कई बचकाने राजनीतिज्ञ यह मानने की गंभीर गलती करते हैं कि हिंदुस्तान
पहले से ही एक समन्वयवादी राष्ट्र के ढांचे में ढल चुका है या इच्छा होते
ही इसे एक समन्वयवादी राष्ट्र बनाया जा सकता है। हमारे ये सदाशयी किंतु
अविवेकी मित्र यथार्थ के स्पप्नद्रष्टा हैं। इसीलिए वे सांप्रदायिक झगड़ों से
अधीर होते रहते हैं और उनका दोष सांप्रदायिक संगठनों पर डाल देते हैं।
परंतु ठोस तथ्य यह है कि ये तथाकथित सांप्रदायिक प्रश्न हमें हिंदुओं और
मुसलमानों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय टकराव
के फलस्वरूप विरासत में मिले हैं। सही समय आने पर आप उन्हें हल कर
सकेंगे, परंतु उन्हें स्वीकारने से इन्कार करके आप उन्हें दबा नहीं सकते।
किसी पुरानी, गहरी जड़ वाली बीमारी की उपेक्षा करने की जगह उसका
निदान और उपचार करना बेहतर होता है। हमें अप्रिय तथ्यों का बहादुरी से
सामना करना चाहिए। आज हिंदुस्तान को एकात्मक और समजातीय राष्ट्र
नहीं कहा जा सकता, बल्कि इसके विपरीत यहां हिंदू और मुस्लिम दो
प्रमुख राष्ट्र हैं।य्
यह बात सुनने में भले ही विचित्र लगे, पर एक राष्ट्र बनाम दो राष्ट्र के प्रश्न पर श्री सावरकर और श्री जिन्ना के विचार परस्पर विरोधी होने के बजाए एक-दूसरे से पूरी तरह मेल खाते हैं। दोनों ही इस बात को स्वीकार करते हैं, और न केवल स्वीकार करते हैं बल्कि इस बात पर जोर देते हैं कि भारत में दो राष्ट्र हैंः एक मुस्लिम राष्ट्र और एक हिंदू राष्ट्र। उनमें मतभेद केवल इस बात पर है कि इन दोनों राष्ट्रों को किन शर्तों पर एक दूसरे के साथ रहना चाहिए। जिन्ना कहते हैं कि हिंदुस्तान के दो टुकड़े कर देने चाहिए, पाकिस्तान और हिंदुस्तान। मुस्लिम कौम पाकिस्तान में रहे और हिंदू कौम हिंदुस्तान में। दूसरी ओर श्री सावरकर इस बात पर जोर देते हैं कि यद्यपि भारत में दो राष्ट्र हैं, परंतु हिंदुस्तान को दो भागों में - एक मुस्लिमों के लिए और दूसरा हिंदुओं के लिए - नहीं बांटा जाएगा। ये दोनों कौमें एक ही देश में रहेंगी और एक ही संविधान के अंतर्गत रहेंगी। यह संविधान ऐसा होगा जिसमें हिंदू राष्ट्र