7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 148

पाकिस्तान का हिंदू विकल्प

प्रस्तावऽ पारित किया गया, उससे यह बात स्पष्ट हो जाती है।

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यद्यपि खिलाफत कमेटी द्वारा असहयोग आंदोलन छेड़ा गया था तथा कांग्रेस ने मूलतः खिलाफत की पुनर्स्थापना में सहयोग देने के लिए इसे स्वीकार कर लिया था, तथापि महात्मा गांधी ने ही खिलाफत कमेटी को असहयोग आंदोलन का सुझाव दिया था तथा स्वयं इस कमेटी से जुड़े रहे, और इस आंदोलन को छेड़ने का बीड़ा उठाया तथा इसे कांग्रेस द्वारा स्वीकार भी कराया।

23 नवंबर, 1919 को दिल्ली में हुए पहले खिलाफत आंदोलन में श्री गांधी मौजूद थे। न केवल श्री गांधी वहां मौजूद थे, बल्कि उन्होंने ही मुस्लिमों को सलाह दी कि अंग्रेजों से अपनी खिलाफत संबंधी मांगों को मनवाने के लिए असहयोग आंदोलन को अपना लें। खिलाफत आंदोलन में श्री गांधी का शामिल होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुस्लिम इस बात के लिए उत्सुक थे कि खिलाफत आंदोलन की प्रक्रिया में हिंदुओं का सहयोग मिले। 23 नवंबर, 1919 को हुए सम्मेलन में भाग लेने के लिए मुस्लिमों

ऽ इस बात को देखते हुए कि खिलाफत के सवाल पर हिंदुस्तानी सरकार और शाही सकरार दोनों ही

हिंदुस्तान के मुस्लिमों के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में असफल रही हैं और प्रधानमंत्री ने जानबूझकर

उनको दिया हुआ अपना वचन तोड़ा है, और यह हर गैर-मुस्लिम हिंदुस्तानी का फर्ज है कि प्रत्येक

वैध तरीके से मुस्लिम भाई की इस घोर धार्मिक विपत्ति को दूर करने में सहायता करें।

और इस बात को देखते हुए कि अप्रैल 1919 की घटनाओं में पंजाब के निर्दोष लोगों की रक्षा करने

तथा गैर-फौजी और बर्बर व्यवहार करने वाले उन अफसरों को सजा देने में उल्लिखित दोनों सरकारों

ने घोर उपेक्षा बरती है और असफल रही हैं, और उस पर माइकेल ओडायर को माफ कर दिया है जो

सरकारी अपराधों और अपने शासन में रहने वाले लोगों के कष्टों का सीधे जिम्मेदार था, और हाउस

ऑफ लॉर्ड्स में हुए वाद-विवाद में हिंदुस्तान के लोगों के प्रति सहानुभूति का नितांत अभाव देखा गया,

और पंजाब में जानबूझकर आतंक और डर पैदा किया गया, और हाल की वायसराय द्वारा की गई

उद्घोषणा इस बात के प्रतीक हैं कि खिलाफत आंदोलन और पंजाब के मामले में सरकार को जरा भी

पश्चाताप नहीं है।

फ्इस कांग्रेस का विचार है कि उपर्युक्त दो भूलों को सुधारे बिना भारत में असन्तोष बना रहेगा और

स्वराज्य की स्थापना की राष्ट्र सम्मान को प्रमाणित करने तथा भविष्य में इसी तरह की भूलों को दोहराने

से रोकने का एकमात्र प्रभावी माध्यम है।य्

फ्इस कांग्रेस का आगे विचार है कि जब तक उक्त भूलों को सुधार नहीं लिया जाता और स्वराज्य की

स्थापना नहीं हो जाती भारत की जनता के लिए महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए प्रगामी अहिंसक

असहयोग की नीति को मानने तथा इसका पालन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह गया है।य्

श्रीमती एनी बेसेंट का कथन है, फ्यह स्मरण होगा कि महात्मा गांधी ने मार्च 1920 में खिलाफत की

रक्षा में असहयोग को अन्य सवालों से अलग रखा था_ किन्तु देखा गया कि खिलाफत हिन्दुओं के लिए

उतना लुभावना नहीं थाय्, इसलिए 30 और 31 मई को बनारस में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी

की बैठक में भड़काने वाले कारणों की सूची में पंजाब अत्याचार को और सुधार अधिनियम की कमियों

को भी सम्मिलित कर लिया गया - द फयूचर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स, पृ. 250