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पाकिस्तान का हिंदू विकल्प

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करना है तो उन्हें गोहत्या बंद कर देनी चाहिए, भले ही हिंदू उन्हें सहयोग

दें या न दें। इस तरह, यद्यपि मैं गाय की पूजा करने में किसी भी हिंदू

से कम नहीं हूं, पर सहयोग देने से पूर्व गोहत्या-बंदी की शर्त नहीं लगाना

चाहता। बिना शर्त सहयोग देने का मतलब है गाय की रक्षा करना।य्ऽ

जो हिंदू असहयोग आंदोलन में शामिल होने से इसलिए डरते थे कि मुस्लिम अफगानों को हिंदुस्तान पर आक्रमण करने के लिए निमंत्रण दे सकते हैं, उनसे श्री गांधी ने कहाः

फ्हिंदुओं की आशंका को समझना और उसे उचित ठहराना बहुत आसान

है। मुसलमानों की स्थिति का विरोध करना कठिन है। मेरी राय में हिंदुस्तान

को इस्लामी और अंग्रेजी शक्तियों का आपसी युद्धक्षेत्र बनने से रोकने

का सर्वोत्तम उपाय यह है कि हिंदू असहयोग आंदोलन को तत्काल और

पूर्णतः सफल बनाएं, और मुझे इस बारे में रत्ती भर भी संदेह नहीं कि

यदि मुस्लिम अपने घोषित विचारों पर दृढ़ रहें और अपने ऊपर नियंत्रण

रख सकें तथा त्याग कर सकें, तो हिंदू भी इस कार्य में भागीदार बनेंगे

और असहयोग आंदोलन में उनके साथ शामिल हो जाएंगे। मैं इस बारे में

भी पूर्णतः निश्चिंत हूं कि हिंदू मुसलमानों की इस काम में कभी मदद

नहीं करेंगे कि वे अंग्रेज सरकार और उसके मित्रों तथा अफगानिस्तान के

बीच सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा दें, अथवा शुरू कराएं। ब्रिटिश सेनाएं इतनी

सुसंगठित हैं कि हिंदुस्तान की सीमाओं पर कोई भी सफल आक्रमण नहीं

होने देंगी। इसलिए मुसलमानों के सामने इस्लाम की इज्जत की खातिर अंग्रेज

से प्रभावी संघर्ष करने का एकमात्र तरीका यह है कि असहयोग आंदोलन

पूरी ईमानदारी से चलाया जाए। यदि लोग इसे व्यापक पैमाने पर चलाएं, तो

यह न केवल पूरी तरह प्रभावकारी होगा, बल्कि इसमें व्यक्ति की अंतरात्मा

की आवाज ध्वनित होगी। यदि मैं किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा किए गए

अन्याय को सहन नहीं कर सकता, और यदि मैं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से

उस व्यक्ति या संगठन का समर्थन करता हूं, तो मुझे इसके लिए अपने

नियंता के सामने जवाबदेह होना पड़ेगा। परंतु मैंने उस आचार-संहिता का,

जो गलत काम करने वालों को भी हानि नहीं पहुंचाना चाहती, इतना कड़ाई

से पालन किया है, जितना कोई मनुष्य कर सकता है। इसलिए इतनी बड़ी

शक्ति का प्रयोग करने में कोई जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए, कोई

क्रोध नहीं दिखाया जाना चाहिए। असहयोग आंदोलन तो निश्चित रूप से

ऽ ‘यंग इंडिया’, 10 दिसम्बर, 1919