146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
क्या कोई भी समझदार व्यक्ति हिंदू-मुस्लिम एकता की खातिर इतनी दूर जा सकता है? परंतु श्री गांधी हिंदू-मुस्लिम एकता पर इतने आसक्त थे कि उन्होंने यह समझने की भी तकलीफ नहीं की कि पागलपन भरे अपने इन कामों से वह असल में क्या करने जा रहे हैं। सच्चे ढंग से हिंदू-मुस्लिम एकता की नींव डालने के लिए श्री गांधी इतने उत्सुक थे कि राष्ट्रीय संकट के बारे में अपने अनुयायियों को सलाह देना नहीं भूले। 8 सितम्बर, 1920 के ‘यंग इंडिया’ में अपने एक लेख में श्री गांधी ने कहाः
फ्अपने मद्रास दौरे के दौरान मुझे बेजवाड़ा में राष्ट्रीय संकट की चर्चा
करने का मौका मिला और मैंने सुझाव दिया कि हमें व्यक्तियों की जगह
आदर्शों के नारे लगाने चाहिए। मैंने अपने श्रोताओं से कहा कि ‘महात्मा
गांधी की जय’ और ‘मोहम्मद अली शौकत अली की जय’ की जगह
हमें ‘हिंदू-मुस्लिम की जय’ बोलनी चाहिए। भाई शौकत अली ने, जो
मेरे बाद बोले, इस बारे में पक्का नियम बना दिया। हिंदू-मुस्लिम एकता
के बावजूद उन्होंने कहा कि यदि हिंदू ‘वंदे मातरम्’ बोलते हैं तो मुस्लिम
‘अल्ला-हो-अकबर’ बोलते हैं_ और इसके विपरीत भी होता है। उन्होंने
ठीक ही कहा कि यह कानों को बड़ा खराब लगता है, और यह दिखाता है
कि लोग एक ही तरह से नहीं सोचते। इसलिए केवल तीन ही नारे स्वीकार
किए जाने चाहिएं। हिंदुओं और मुसलमानों को खुशी-खुशी बोलना चाहिए
‘अल्ला हो-अकबर’_ जो यह दिखाता है कि केवल ईश्वर ही बड़ा है, और
कोई नहीं। दूसरा नारा होना चाहिए ‘वंदे मातरम्’ - हमारी ‘मातृभूमि की
जय या भारत माता की जय’। तीसरा नारा होना चाहिए - ‘हिंदू-मुसलमान
की जय’ जिसके बिना भारत की विजय नहीं हो सकती और न भगवान
की महानता का दर्शन हो सकता है। मैं भी चाहता हूं कि अखबारों और
जनता के नेताओं को मौलाना के सुझावों को अपनाना चिहए और यही
तीन नारे लगाने के लिए लोगों का नेतृत्व करना चाहिए। ये बड़े सार्थक
नारे हैं। पहले तो यह प्रार्थना है, और यह स्वीकार करना है कि हम बहुत
‘लघु’ हैं, और इस तरह यह विनम्रता का प्रतीक है। यह एक ऐसा नारा
है जो सभी हिंदुओं और मुसलमानों को बड़े आदरपूर्वक और विनम्रता से
लगाना चाहिए। हिंदुओं को अरबी शब्दों को लेकर नहीं लड़ना चाहिए,
क्योंकि उनका अर्थ न केवल पूरी तरह आपत्तिविहीन है, बल्कि महानतापूर्ण
भी है। भगवान किसी विशेष भाषा का आदर नहीं करता। वंदे मातरम् का
बहुत-सी बातों से घनिष्ठ संपर्क होने के नाते मैं एक ही राष्ट्रीय इच्छा
प्रकट करता हूं - हिंदुस्तान अपनी पूरी ऊंचाइयों तक उठे। और मैं भारत