7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 159

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

साक्ष्य हैं, उनके मुताबिक मोपलाओं को सहनशक्ति की सीमा के बाहर

उत्तेजित किया गया था और इस बारे में सरकार ने जो रिपोर्ट पेश की है,

वह इकतरफा है_ और उसमें मोपलाओं द्वारा की गई गलतियों को बहुत

बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है और फिर शांति और व्यवस्था कायम करने

के नाम पर सरकार ने जनधन का जो अनावश्यक विनाश किया, उसके

बारे में बहुत कम बताया गया है।

वर्किंग कमेटी को यह देखकर दुःख होता है कि मोपला लोगों में

से कुछ धर्मांध व्यक्तियों द्वारा जबरन धर्म-परिवर्तन के कुछ मामले हुए हैं,

किंतु वह जनता को चेतावनी देना चाहती है कि वह इस बारे में सरकार

प्रेरित तथ्यों और उकसाने वाले वक्तव्यों पर न जाए। कमेटी के सामने जो

रिपोर्ट है, उसमें कहा गया हैः-

फ्जिन परिवारों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित करने की रिपोर्ट

है, वे मंजेरी के पड़ोस में रहते थे। यह स्पष्ट है कि हिंदुओं का जबरन

धर्म-परिवर्तन एक धर्मांध गुट द्वारा कराया गया था, जो हमेशा से खिलाफत

और असहयोग आंदोलन का विरोधी रहा है, और जहां तक हमें सूचना है,

ऐसे केवल तीन मामले हुए हैं।य्

मुसलमानों के अत्याचारों के ऐसे मामलों के बारे मेंं जहां श्री गांधी ने चुप्पी साध ली थी उनकी चर्चा स्वामी श्रद्धानंद ने अपने साप्ताहिक पत्र ‘लिबरेटर’ में की। 30 सितम्बर, 1926 के अंक में स्वामी जी ने कहाः

फ्जहां तक अस्पृश्यता को मिटाने की बात है, यह कई बार अधिकृत रूप

से बताया जा चुका है कि हिंदुओं का कर्तव्य है कि वे अपने पिछले

पापों का प्रायश्चित करें और गैर-हिंदुओं को इससे कुछ लेना-देना नहीं

होना चाहिए। परंतु मुस्लिम और ईसाई कांग्रेसियों ने वेकोम और कई अन्य

स्थानों में इस बारे में श्री गांधी के आदेश का खुला उल्लंघन किया है। श्री

याकूब हसन जैसे निष्पक्ष नेताओं ने भी मद्रास में एक सभा की, जो मुझे

मानपत्र देने के लिए बुलाई थी, अध्यक्षता करते हुए खुलेआम मुसलमानों

का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें सारे अछूतों का धर्म-परिवर्तन करके

इस्लाम में शामिल कर लेना चाहिए।य्

परंतु श्री गांधी ने ईसाइयों या मुसलमानों की इस बात के विरोधस्वरूप एक शब्द भी नहीं कहा।

स्वामी जी ने जुलाई 1926 के अंक में लिखा हैः