पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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कारण बन रही है, तो उसका उपचार भी मुझे ही ढूंढना होगा।
फ्अमेठी, संभल और गुलबर्गा की घटनाओं ने मुझे बुरी तरह झकझोर दिया है। मैंने अमेठी और संभल के बारे में हिंदू और मुसलमान दोस्तों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पढ़ी। मुझे गुलबर्गा जाने वाली हिंदू और मुसलमान दोस्तों द्वारा तैयार संयुक्त रिपोर्ट के बारे में भी पता चला। मैं गहरी पीड़ा से छटपटा रहा था और मुझे कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। कोहाट की रिपोर्ट ने तो मानों सुलगती सामग्री को भड़का दिया। कुछ न कुछ तो करना ही था। मैंने दो रातें बड़ी बेचैनी और पीड़ा में बिताई थीं। बुधवार को मुझे उपाय सूझ गया। मुझे पश्चाताप करना चाहिए।
फ्जो हिंदू और मुसलमान यह कहते हैं कि वे मुझसे प्यार करते हैं, यह उन दोनों के लिए एक चेतावनी है। यदि उन्होंने मुझे सच्चा प्यार किया है और मैं उनके प्यार का अधिकारी हूं, तो वे भी मेरे साथ इस घोर पाप के लिए प्रायश्चित करेंगे कि उन्होंने अपने दिलों में भगवान की उपस्थिति से इंकार कर दिया था।
फ्हिंदुओं और मुसलमानों का प्रायश्चित उपवास करना नहीं है, बल्कि अपने कदम से पीछे हटाना है। हरेक मुसलमान के लिए सच्चा प्रायश्चित यह होगा कि वह अपने हिंदू भाई के प्रति अपने दिल में कोई दुर्भावना न रखे। इसी तरह एक हिंदू के लिए भी सच्चा प्रायश्चित यही होगा कि वह अपने मुसलमान भाई के प्रति कोई दुर्भावना न रखे।
फ्मैंने मित्रों से परामर्श नहीं किया है - हकीम साहब से भी नहीं, जो बुधवार को काफी देर मेरे साथ रहे थे - न ही मौलाना मुहम्मद अली से, जिनकी मेहमाननवाज़ी का मैं लाभ उठा रहा हूं।
फ्परन्तु क्या मेरे लिए यह ठीक था कि मैं एक मुसलमान के घर में रहकर अनशन करूं (श्री गांधी उन दिनों दिल्ली में मौलाना मुहम्मद अली के मेहमान थे)। हां, यह ठीक था। मेरा अनशन किसी भी व्यक्ति के लिए दुर्भावना लिए हुए नहीं है। एक मुसलमान के घर रहने से यह निश्चित हो जाएगा कि उसका कोई ऐसा अर्थ नहीं निकाला जाए। यह उचित ही होगा कि यह एक मुसलमान के घर में शुरू किया जाए और खत्म भी।
फ्और यह मुहम्मद अली कौन हैं? अभी अनशन से दो दिन पहले ही मैंने उनसे एक निजी बात के बारे में विचार-विमर्श किया था। उस