पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
के साथ ही तोड़ दिए जाते थे।
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श्री गांधी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए जो भूमिका अदा की, यह उसका संक्षिप्त ऐतिहासिक विवरण है और इसके निष्कर्ष के रूप में सांप्रदायिक समझौते के समय हुई वार्ताओं में श्री गांधी के दृष्टिकोण का उल्लेख किया जा सकता है। उन्होंने मुसलमानों को एक कोरा चेक देने का प्रस्ताव किया। इस कोरे चेक की बात से मुसलमान और चिढ़ गए और उन्होंने इसे टरकाने का प्रयास बताया। गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने पृथक निर्वाचक-मंडलों का विरोध किया। जब कम्यूनल एवार्ड के अंतर्गत मुस्लिमों को ये अधिकार दे दिए गए तो श्री गांधी और कांग्रेस ने उस पर अपनी स्वीकृति नहीं दी। परंतु जब इस पर वोट लेने का सवाल आया, तो उन्होंने एक विचित्र दृष्टिकोण अपना लिया - न तो इसे स्वीकार किया और न ही इसका विरोध किया।
श्री गांधी के हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने के प्रयासों का यही इतिहास है। इन प्रयासों का क्या फल निकला? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए इस बात की जांच करनी चाहिए कि 1920-40 के बीच दोनों समुदायों के आपसी संबंध कैसे रहे, क्योंकि इन वर्षों के दौरान श्री गांधी ने हिंदू-मुस्ल्मि एकता स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत की थी। इन सबका शानदार वर्णन हिंदुस्तानी मामलों के बारे में दी गई वार्षिक रिपोर्टों से मिलता है, जो पुराने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के अंतर्गत हिंदुस्तान की सरकार ब्रिटिश पार्लियामेंट में प्रतिवर्ष प्रस्तुत करती थी। नीचे मैंने जो तथ्य दिए हैं, वे इन्हीं रिपोर्टों से लिए गए हैं।ऽ
1920 से शुरू इन रिपोर्टों के अनुसार उस वर्ष मलाबार से होने वाला मोपला विद्रोह दो मुस्ल्मि संगठनों खुद्दम-ए-काबा और सेंट्रल खिलाफत कमेटी के आंदोलनों के कारण शुरू हुए। दरअसल आंदोलनकारियों ने इस सिद्धांत का प्रचार किया कि ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत हिंदुस्तान दारूल हरब था और मुसलमानों को इसके विरुद्ध अवश्य लड़ाई लड़नी चाहिए और यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो उनके समक्ष एकमात्र विकल्प ‘हजरत’ का सिद्धांत रह जाता है। मोपला लोग इस आंदोलन से अचानक मानों आभूत हो गए। यह मूल रूप से ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध एक विद्रोह था। इसका उद्देश्य था ब्रिटिश साम्राज्य का तख्ता उलटकर उसकी जगह इस्लामिक साम्राज्य की स्थापना करना। छुप-छुप कर चाकू, छुरे और भाले बनाए गए और ब्रिटिश सत्ता पर हमला करने के लिए दुस्साहसी लोगों के दल बनाए गए। 20 अगस्त को पीरूनांगडी में मोपलों और ब्रिटिश सैनिकों से भयंकर झड़पें हुईं। रास्तों में रुकावटें पैदा की गईं।
ऽ ‘1920 में भारत सीरीज’ के नाम से जानी जाती है, और इसी प्रकार आगे की सीरीज।