7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 165

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

तार की लाइनें काट दी गईं और कई जगह रेलें नष्ट कर दी गईं। जैसे ही प्रशासन अस्त-व्यस्त हुआ, मोपलों ने घोषणा कर दी कि स्वराज स्थापित हो गया है। अली मुदालियार नामक एक व्यक्ति के राजा बनने की घोषणा कर दी गई, खिलाफत के झंडे फहराए गए और इरनाडु तथा वालुराना खिलाफत सन्तनतें घोषित कर दी गईं। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध यह विद्रोह ठीक से समझ में आता है। परंतु जिस बात से लोग चकरा गए थे, वह था मोपलों का मलाबार के हिंदुओं के साथ व्यवहार। हिंदुओं को मोपलों के हाथों भयंकर विपत्ति का सामना करना पड़ा। कत्लेआम, जबरन धर्म-परिवर्तन, मंदिरों का भ्रष्ट किया जाना, स्त्रियों पर भीषण अत्याचार, जैसे गर्भवती महिलाओं का पेट चीर देना, लूटमार, आगजनी और तबाही। संक्षेप में, वहां बर्बरता का बेलगाम नंगा नाच हुआ ओर मोपलों ने हिंदुओं पर तब तक बेइंतहा जुल्म ढाए, जब तक कि सेना उस दुर्गम इलाके में शीघ्रातिशीघ्र शांति स्थापित करने नहीं पहुंची। यह महज एक हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं था। यह तो बार्थोलोमेव (दैत्य) था। अनगिनत हिंदू मारे गए, जख्मी हुए और उनका धर्म-परिवर्तन हुआ। हिंदुओं की संख्या का पता ही नहीं। परंतु यह संख्या बहुत अधिक है।

1921-22 में सांप्रदायिक विद्वेष शांत नहीं हुआ। मुहर्रम के मौके पर पंजाब और बंगाल दोनों प्रांतों में भारी दंगे हुए। पंजाब में, विशेषकर मुलतान में, तो भीषण दंगे हुए जहां मृतकों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, वहां संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

यद्यपि वर्ष 1922-23 अपेक्षाकृत शांत रहा, परंतु समूचे 1923-24 के वर्ष में तनाव बना रहा। परंतु किसी भी अन्य इलाके में इस तनाव के इतने दुखद परिणाम नहीं हुए जितने कि कोहाट शहर में देखे गए। इन दंगों का तात्कालिक कारण था इस्लाम-विरोधी कविता के एक पेंफलेट का प्रकाशन और वितरण। 9 और 10 सितंबर, 1924 को वहां भीषण दंगे हुए, जिनमें कुल 155 व्यक्ति मारे गए ओर अनेक जख्मी हुए। लगभग 9 लाख रुपए की संपत्ति नष्ट की गई और भारी मात्रा में माल-असबाब लूटा गया। वहां आतंक का इतना भीषण साम्राज्य था कि सारे हिंदू कोहाट शहर छोड़कर भाग गए। दीर्घकाल तक वार्ता चलने के बाद दोनों समुदायों के बीच शांति-स्थापना के लिए तब तक समझौता हुआ जब सरकार ने आश्वासन दिया कि कुछेक अपवादों के अलावा दंगों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध मामले वापस लिए जाएंगे। पीडि़तों को अपना व्यवसाय फिर शुरू करने के लिए तथा फिर से अपने मकान बनवाने के लिए कई मामलों में सरकार ने 5 लाख रुपए तक ब्याज मुक्त अग्रिम धन दिया। परंतु इस समझौते के होने और पलायनकर्ताओं के वापस कोहाट लौट आने के बावजूद 1924-25 में शांति स्थापित नहीं हुई और देश के विभिन्न