लीग की मांगे क्या हैं?
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प्रांत भाषा मुख्यालय
अजमेर-मेरवाड़ा हिंदुस्तानी अजमेर
आंध्र तेलुगु मद्रास
आसाम असमी गोहाटी
बिहार हिंदुस्तानी पटना
बंगाल बंगाली कलकत्ता
बंबई (नगर) मराठी-गुजराती बंबई
दिल्ली हिंदुस्तानी दिल्ली
गुजरात गुजराती अहमदाबाद
कर्नाटक कन्नड़ धारवाड़
केरल मलयालम कालीकट
महाकौशल हिंदुस्तानी जबलपुर
महाराष्ट्र मराठी पूना
नागपुर मराठी नागपुर
उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत पुश्तो पेशावर
पंजाब पंजाबी लाहौर
सिंध सिंधी कराची
तमिलनाडु तमिल मद्रास
संयुक्त प्रांत हिंदुस्तानी लखनऊ
उत्कल उडि़या कटक
विदर्भ (बरार) मराठी अकोला
इस वितरण में क्षेत्र, जनसंख्या अथवा राजस्व संबंधी पक्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया गया था। प्रांतीयता के उद्देश्यों से क्षेत्रों के वितरण संबंधी इस योजना में इस विचार को दृष्टिगत नहीं रखा गया कि प्रत्येक प्रशासनिक इकाई सभ्य जीवन का न्यूनतम स्तर उपलब्ध कराने और जुटाने में समर्थ होनी चाहिए, जिसके लिए यह जरूरी है कि उसमें समुचित क्षेत्र व पर्याप्त जनसंख्या हो तथा अपेक्षित राजस्व की व्यवस्था हो। निर्णायक पक्ष भाषा ही था। इस संभावना पर कोई ध्यान नहीं दिया गया कि ऐसा होने से भारतीय सामाजिक जीवन के पहले से ही ढीले-ढाले ढांचे में एक विघटनकारी तत्व समाविष्ट हो सकता है। निस्संदेह यह योजना लोगों की स्थानीय देशभक्ति को जगाकर उन्हें कांग्रेस के पक्ष में लाने के एकमात्र उद्देश्य से पेश की गई थी। भाषायी प्रांतों का विचार घर कर चुका है और क्रियान्वित करने की मांग इतनी प्रबल और अप्रतिरोधी हो चुकी है कि जब कांग्रेस सत्ता में आएगी तो उसे इस योजना को क्रियान्वित करने को बाध्य होना पड़ेगा। उड़ीसा को बिहार से अलग