पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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समुदाय के लोगों पर घातक हमले किए। इनमें से कई भीषण अत्याचार ‘रंगीला रसूल’ और ‘रिसाला वर्तमान’ में हजरत मुहम्मद को लेकर की गई अश्लील टिप्पणियों के कारण हुए, जिनके फलस्वरूप अनेक निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और कई बार तो उन्हें बड़ी बबर्रता का शिकार होना पड़ा। लाहौर में इक्के-दुक्के हमलों के कारण 1927 की गर्मियों में बहुत उत्तेजना और असुरक्षा की भावना फैल गई।
‘रंगीला रसूल’ऽ के कारण उत्पन्न उत्तेजना अपने मूल केंद्र से बढ़कर दूर-दूर तक फैल गई थी और जुलाई तक उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत से इसके दुखद परिणाम आने लगे। इस क्षेत्र में इस विपत्ति के आरंभिक लक्षण जून के शुरू में दिखाई देने लगे थे, परंतु जुलाई के अंत तक तो यह उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई। सीमा के इस पार के ब्रिटिश साम्राज्य वाले इलाके में तो स्थानीय अधिकारियों द्वारा कड़े और बुद्धिमत्तापूर्ण कदम उठाने से शांति भंग होने का गंभीर खतरा टल गया। पर ब्रिटिश सीमा में आने वाले जिलों, विशेषकर पेशावर में इस बात का खुल्लम-खुल्ला प्रचार किया गया कि हिंदुओं का आर्थिक बहिष्कार किया जाए। परंतु इस आंदोलन को कोई सफलता नहीं मिली और यद्यपि एक दो गांवों में हिंदुओं से दुर्व्यवहार किया गया, किंतु अपराधियों की धर-पकड़ और फौजदारी कानून के अंतर्गत कदम उठाने से शीघ्र ही व्यवस्था कायम हो गई। तथापि सीमा के उस पार, हज़रत मोहम्मद की आलोचना के अधिक गंभीर परिणाम निकले। सीमावर्ती इलाके के ये कबायली मजहब के नाम पर की गई अपीलों से शीघ्र ही भावुक हो जाते हैं और जब एक प्रसिद्ध मुल्ला ने खैबर दर्रे के पास रहने वाले अफगानियों और शिनवारियों में हिंदुओं के विरुद्ध प्रचार शुरू कर दिया, तो उसका बहुत असर हुआ। मुल्ला ने अफरीदियों और शिनवारियों से कहा कि जो हिंदू उनके बीच में रहते हैं, वे जब तक लिखित रूप से यह घोषणा न करें कि वे अपने धर्मावलंबियों द्वारा अन्यत्र किए गए कारनामों से अपने आपको अलग नहीं कर करते तब तक उनका बहिष्कार किया जाए। जिन लोगों ने 22 जुलाई को सबसे पहले अपने हिंदू पड़ौसियों को भगाया वे थे खैबर अफरीदियों के दो कबीले कुइखेल और लक्काखेल। वहां से यह उत्तेजना उनके शिन्वारी पड़ौसियों में फैली, जिन्होंने दो दिन में हिन्दुओं को वह जगह छोड़ देने का नोटिस दे दिया। तथापि कुछेक हिंदुओं के वहां से चले जाने के बाद शेष हिंदुओं को वहीं रहने देने के लिए वे तैयार हो गए। खैबर छोड़ने वाले हिंदुओं के साथ बुरा बर्ताव किया गया। दो मामलों में पत्थर फेंके गए, यद्यपि सौभाग्यवश उनसे कोई नुकसान नहीं हुआ। तीसरे
ऽ ‘रंगीला रसूल’ एक मुस्लिम द्वारा लिखित ‘सीता का छिनाला’ शीर्षक पैम्फलेट के जवाब में लिखा गया
था। ‘सीता का छिनाला’ में रामायण के नायक राम की पत्नी सीता को एक वेश्या बताया गया था।