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पाकिस्तान का हिंदू विकल्प

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संप्रदायों के वैर-भाव को उकसाने और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के समाचारों के लिए समाचारपत्रों (प्रेस) को दंडित करने संबंधित कानून पास किए जाने से विभिन्न संप्रदायों के बीच स्थिति सुधारने में मदद मिली। 31 मार्च, 1929 को समाप्त होने वाले वर्ष में 22 दंगे हुए। यद्यपि दंगों की यह संख्या अपेक्षाकृत कम थी, तथापि हताहतों की संख्या बहुत अधिक थी, जो वास्तव में बंबई के गंभीर दंगों के कारण बढ़ गई थीं। इनमें कम से कम 204 व्यक्ति मारे गए और लगभग 1200 घायल हुए। इनमें से बंबई में एक पखवाड़े तक चलने वाले दंगों में ही 149 व्यक्ति मारे गए थे और 739 जख्मी हुई थे। इन 22 दंगों में से 7 अर्थात् करीब एक तिहाई मई के अंत में मुसलमानों के वार्षिक त्यौहार बकरीद के मौके पर हुए थे। यह त्यौहार हिंदू-मुस्लिम संबंधों के लिए हमेशा खतरनाक सिद्ध होता है। मुसलमान जिस पशु की बलि देते हैं, और जिसे चुना जाता है, वह लगभग हमेशा ही गाय होती है। इसलिए दोनों समुदायों में मामूली-सा तनाव भी विस्फोटक बन जाता है। बकरीद के मौके पर होने वाले दंगों में केवल दो ही भयंकर थे, और दोनों ही पंजाब में हुए। पहला अंबाला जिले के एक गांव में हुआ, जिसमें 10 व्यक्ति मारे गए और 9 जख्मी हुए। दूसरा दंगा दक्षिणी पंजाब के गुड़गांव जिले के सोफता गांव में हुआ। इसके सनसनीखेज़ होने के कारण इसको पर्याप्त प्रसिद्धि मिली। सोफता गांव दिल्ली से 27 मील दक्षिण में है और इसमें लगभग सभी मुस्लिम रहते हैं। इस गांव के चारों ओर हिंदू काश्तकारों के गांव हैं और जब उन्होंने सुना कि सोफता गांव के मुसलमान ईद के दिन गाय की कुरबानी देना चाहते हैं, तो उन्होंने बलि के लिए चुनी गई गाय विशेष की बलि देने पर आपत्ति की कि उस गाय को हिंदू काश्तकारों के खेत में चराया जाता था। इस मामले पर विवाद ने खतरनाक रूप धारण कर लिया और इसीलिए जिले का पुलिस सुपरिटेंडेंट 25 जवानों की एक छोटी-सी टुकड़ी लेकर शांति-स्थापना के लिए वहां गया। उसने विवादित गाय अपने कब्जे में ले ली और उसे ताले में बंद कर दिया। परंतु उसकी उपस्थिति का भी हिंदू काश्तकारों के इकट्टòे होने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और लगभग एक हजार व्यक्ति बरछे, भाले और लाठियों से लैस होकर सोफता गांव की ओर रवाना हो गए। पुलिस सुपरिटेंडेंट और मालगुजारी महकमे के एक अफसर ने, जो गांव में मौजूद थे, भीड़ को आश्वासन दिया कि जिस गाय को लेकर विवाद

खड़ा हुआ है, उसकी बलि नहीं दी जाएगी। परंतु भीड़ इससे संतुष्ट नहीं हुई और उन्होंने धमकी दी कि यदि किसी भी गाय की बलि दी गई तो वे सारे गांव को जला देंगे और उन्होंने यह भी मांग की कि यह गाय उन्हें सौंप दी जाए। पुलिस सुपरिटेंडेंट ने यह मांग मानने से इंकार कर दिया, जिससे भीड़ हिंसक हो उठी और उसने पुलिस