7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 175

166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

और 31 जनवरी को रावलपिंडी में भी दंगे हुए। समूचे उत्तरी हिंदुस्तान में 1931 के पहले दो महीने में पारस्परिक संबंधों में उल्लेखनीय गिरावट आई और फरवरी में तो बनारस में पहले ही गंभीर दंगे हो चुके थे। ऐसी स्थिति बनने का मुख्य कारण यह था कि कांग्रेस की गतिविधियों के कारण कारोबार लगभग चौपट हो गया था तथा देश में अस्थिरता और अशांति का वातावरण छाया हुआ था और इससे मुसलमान व्यापारियों का व्यापार चौपट होने से उनमें काफी उत्तेजना फैल गई थी। सरकार से कांग्रेस की वार्ता चलने के कारण कांग्रेस के बढ़ते महत्व से मुसलमानों में गंभीर आशंका घर कर गई, जिसके फलस्वरूप दोनों समुदायों में तनाव बढ़ने लगा। संयुक्त प्रांत में तो यह तनाव बहुत बढ़ गया। 14 और 16 मार्च के बीच मिर्जापुर जिले में गंभीर दंगे हुए और 17 मार्च को आगरा में दंगे शुरू होकर 20 मार्च तक चले। एक सांप्रदायिक दंगा धनबाद (बंगाल) में 28 मार्च को हुआ और अमृतसर जिले में 30 मार्च को। देश के अन्य कई भागों में भी दंगे हुए। दोनों समुदायों के सदस्यों के बीच संबंध अत्यधिक तनावपूर्ण हो गए।

आसाम के लखीमपुर जिले के डिगबोई में जो सांप्रदायिक दंगा हुआ, उसमें एक हिंदू और तीन मुस्लिम मारे गए। मुहर्रम के त्यौहार के दौरान बंगाल के आसनसोल डिवीजन में दंगा हो गया। बिहार व उड़ीसा में विशेषकर सारन में, वर्ष-भर कुछ तनाव बना रहा। कुल मिलाकर वहां सांप्रदायिक दंगों और गैर-कानूनी ढंग से जमावड़े की 16 घटनाएं हुईं। बकरीद के मौके पर शाहबाद के भाभुआ सब-डिवीजन में झगड़ा हो गया। गाय की कुर्बानी की गलत सूचना मिलने के कारण लगभग 300 हिंदू इकट्टòे हो गए। स्थानीय अफसर उनको शांत करने में सफल हो गए, परंतु इतने में ही 200 मुसलमानों का एक जत्था लाठी, भालों और तलवारों से लैस होकर वहां पहुंच गया और उसने हिंदुओं पर हमला कर दिया, जिससे बाद में एक हिंदू मर गया। पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई करने और एक सुलह-कमेटी बना देने के कारण दंगा फैलने से रुक गया। मुहर्रम के मौके पर मुंगेर में दो छोटे-छोटे दंगे हएु, जिसमें एक बार हिंदुओं ने हमला किया और दूसरी बार मुसलमानों ने। मद्रास प्रेसीडेंसी में भी वर्ष-भर में कई सांप्रदायिक दंगे हुए और दोनों समुदायों के संबंध निश्चित रूप से तनावपूर्ण हो गए। वर्ष का सबसे गंभीर दंगा 8 जून को वेल्लौर में हुआ, जब ताजियों का जुलूस एक मंदिर के पास से गुजर रहा था। यह संघर्ष इतना अधिक हिंसक था कि शांति स्थापित करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी और अगले दो-तीन दिन तक भी झड़पें होती रहीं। सेलम कस्बे में हिदूं-मुस्लिम तनाव के कारण 13 जुलाई को इस बात को लेकर विवाद पैदा हो गया कि शिवापेट में आयोजित कुश्ती के एक बड़े हिंदू-मुस्लिम दंगल मुकाबले में कौन जीता था। अक्तूबर में एक और दंगा