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10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

किया जा चुका है।ऽ आन्ध्र मद्रास से पृथक राज्य की मांग कर रहा है। कर्नाटक महाराष्ट्र से अलग होने की मांग कर रहा है। गुजरात ही एकमात्र ऐसा भाषायी प्रांत है जो महाराष्ट्र से पृथक होने की मांग नहीं कर रहा है। या फिर गुजरात ने फिलहाल पृथकता का विचार त्याग दिया है। इसका कारण संभवतः यह है कि गुजरात को यह अहसास हो गया है कि महाराष्ट्र से जुड़े रहना, राजनीतिक तथा व्यावसायिक दृष्टि से भी एक बेहतर स्थिति है।

चाहे जो भी, यह तथ्य है कि भाषायी आधार पर पृथकता कांग्रेस के लिए अब एक मान्य सिद्धांत है। यह कहने का कोई लाभ नहीं कि कर्नाटक और आंध्र प्रांत के बंटवारे की मांग भाषा के आधार पर की जा रही है और पाकिस्तान का पृथकतावादी दावा सांस्कृतिक भेदों पर आधारित है। इस अंतर के बिना एक वैशिष्ट्य और हैं। भाषायी अंतर सांस्कृतिक अंतर का ही दूसरा नाम है।

† यदि कर्नाटक और आंध्र की पृथकतावादी मांग में कोई परेशानी की बात नहीं है, तो पाकिस्तान को पृथक कर देने की मांग में ही क्या परेशानी है? यदि यह प्रभाव के लिहाज से विघटनकारी भी है तो महाराष्ट्र से कर्नाटक अथवा मद्रास से आंध्र जैसे हिंदू प्रांतों की पृथकता से अधिक अनिष्टकारी नहीं है। पाकिस्तान जो उस सांस्कृतिक इकाई का प्रादुर्भाव है जो अपने विशिष्ट सांस्कृतिक विकास के लिए स्वतंत्रता की मांग कर रहा है।

ऽ ऐसा भारत सरकार के अधिनियम, 1935 के अंतर्गत किया गया था।

† कर्नाटक भी मद्रास प्रेसीडेंसी के कुछ जिले चाहता है।