पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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में न घुसने दिया जाए, क्योंकि इससे सांप्रदायिक दंगा भड़क सकता था। जुलूस रोकने की पुलिस की सभी कोशिशें नाकाम होने के बाद, रॉयल ससेक्स रेजीमेंट की एक प्लाटून को शांति स्थापित करने के लिए बुलाया गया। भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने और उसे हावी न होने देने के लिए फौज को नजदीक से गोली चलाने पर मजबूर होना पड़ा। कुल 47 राउंड फायर किए गए जिससे 47 आदमी मारे गए और 134 जख्मी हुए। और कुमुक पहुंच जाने से भीड़ की आगे बढ़ने की कोशिश सफल नहीं हुई। घायलों को सिविल अस्पताल ले जाया गया और फिर बिना किसी और फसाद के अब्दुल कयूम की लाश को गाड़ दिया गया।
25 अगस्त, 1935 को सिकंदराबाद में सांप्रदायिक दंगा हुआ।
1936 में चार सांप्रदायिक दंगे हुए। आगरा जिले के फिरोजाबाद में 14 अप्रैल को सबसे भयानक दंगा हुआ। एक मुस्लिम जुलूस मुख्य बाजार में से होकर गुजर रहा था। इलजाम लगाया गया कि उस पर हिंदू घरों से ईंटें फेंकी गईं। इससे जुलूस में शामिल मुसलमान कु्रद्ध हो गए और उन्होंने एक हिंदू डॉ. जीवनराम के घर और पड़ौस के राधाकृष्ण मंदिर को आग लगा दी। डॉ. जीवनराम के घर में रहने वालों के साथ 3 बच्चों सहित 11 और हिंदुओं को भी जीवित जला दिया गया। दूसरा हिंदू-मुस्लिम दंगा बंबई प्रेसीडेंसी के पूना में 24 अप्रैल, 1936 को हुआ। 27 अप्रैल को मुंगेर जिले के जमालपुर में हिंदू-मुस्लिम दंगा हुआ। चौथा हिंदू-मुस्लिम दंगा बंबई में 15 अक्तूबर, 1936 को हुआ।
1937 के दौरान पूरे वर्ष सांप्रदायिक झगड़े होते रहे। 27 मार्च, 1937 को पानीपत में होली के जुलूस को लेकर सांप्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें 14 लोग मारे गए। पहली मई, 1937 को मद्रास में सांप्रदायिक झगड़ा हो गया, जिसमें 50 लोग जख्मी हुए। मई में बहुत से सांप्रदायिक दंगे हुए-अधिकतर मध्य प्रांत और पंजाब में। सिंध में शिकारपुर में होने वाले दंगे से बहुत अधिक आतंक फैल गया। अमृतसर में 18 जून को सिख-मुस्लिम दंगा हुआ। यह इतना ज्यादा फैल गया कि शांति-स्थापना के लिए ब्रिटिश फौज बुलानी पड़ी।
1938 में दो सांप्रदायिक दंगे हुए - 26 मार्च को इलाहाबाद में और दूसरा अप्रैल के महीने में बंबई में।
1939 में 6 हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए। 21 जनवरी को आसनसोल में दंगा हुआ, जिसमें एक आदमी मारा गया और 18 जख्मी हुए। इसके बाद 11 फरवरी को कानपुर में दंगा हुआ, जिसमें 42 आदमी मारे गए, 200 जख्मी हुए और 800 गिरफतार किए गए। 4 मार्च को बनारस में एक दंगा हुआ और 5 मार्च को कलकत्ता के निकट