पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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जिन अनेक भीषण घटनाओं का उन्होंने उल्लेख किया, उनमें से कुछ निम्नलिखित हैंः
फ्सबसे भयंकर सांप्रदायिक झगड़ा 20 तारीख की रात को गोसरजी गांव में हुआ, जो सक्कर से 8 मील और शिकारपुर से 16 मील दूर है। जिला मजिस्ट्रेट ने सरकार को जो प्रारंभिक रिपोर्ट भेजी और जो निश्चित रूप से अधूरी थी, उसके अनुसार उस रात 27 हिंदू मारे गए थे। साक्षियों से की गई पूछताछ से पता चलता है कि मारे जाने वालों की संख्या 37 थी।
गोसरजी के एक ठेकेदार पमनमल ने बताया कि सत्याग्रह के समय गोसरजी के प्रमुख हिंदुओं का एक प्रतिनिधिमंडल इलाके के प्रमुख जमींदार
खान साहब और अमीर बख़्श से मिला, जो उस समय सक्कर में मौजूद था। उसने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता हूं। 20 तारीख को खान साहिब अमीर बख़्श गोसरजी में था और उसी दिन सुबह मुखी महरूमल को वहां कत्ल कर दिया गया। हिंदू फिर अपनी सुरक्षा के लिए खान साहिब अमीर बख़्श के पास गए और उसने फिर आश्वासन दिया, परंतु उसी रात बड़े पैमाने पर नरसंहार और लूटपाट हुई। कत्ल किए गए उन व्यक्तियों में सात औरतें थीं। पमनमल कहता है कि अगले दिन सुबह वह बगेरजी के सब-इंस्पेक्टर के पास गया जो गोसरजी से एक मील दूर है। परंतु वहां उसे गालियां दी गईं और थाने से बाहर निकाल दिया गया। फिर वहां से वह शिकारपुर गया और पंचायत से शिकायत की, किंतु वहां उसने किसी अफसर से शिकायत नहीं की। मैं यहां यह बता दूं कि बाद में बगेरजी के सब-इंस्पेक्टर पर गसेरजी में हुए नरसंहार के सिलसिले में गिरफतारियां न करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के अंतर्गत मुकदमा चलाया गया और सज़ा दी गई।
चूंकि जमींदार खान साहिब अमीर बख़्श, जिसने बगेरजी के हिंदुओं को सुरक्षा का आश्वासन दिया था, अदालत में मौजूद था, इसलिए उसे अदालत में बतौर गवाह पेश होने के लिए कहा गया और उससे जिरह की गई। उसने कहा कि मैं गोसरजी गांव से डेढ़ मीन दूर रहता हूं। बगेरजी का सब-इंस्पेक्टर मेरे पास महरूमल के कत्ल के बाद 20 तारीख को आया और मशीर की तरह व्यवहार किया। यह भी कहा कि हिंदुओं ने सहायता की मांग नहीं की थी और गड़बड़ी की कोई आशंका भी नहीं थी। 20