176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
रिपोर्ट की गई थी, और जिनकी रिपोर्ट नहीं की गई थी उनका पता ही नहीं चला। आमतौर पर 10 प्रतिशत मामलों में ही रिपोर्ट की जाती है या उनका पता चलता है और 90 प्रतिशत का पता ही नहीं चलता। यदि इस तथ्य को बंगाल सरकार से प्राप्त आंकड़ों पर लागू किया जाए तो कहा जा सकता है कि 1922 से 1927 के 5 वर्ष की छोटी-सी अवधि में ही बंगाल में लगभग 35,000 महिलाओं का अपहरण किया गया।
महिलाओं के प्रति व्यवहार से इस बात का सही पता चलता है कि दोनों समुदायों के बीच संबंध कितने मैत्रीपूर्ण अथवा शत्रुतापूर्ण थे। इस बारे में, 27 जून, 1936 को बंगाल के गांव गोविंदपुर में हुई एक घटना शिक्षाप्रद है। 10 अगस्त, 1936 को 40 मुस्लिम अभियुक्तों पर शुरू हुए मुकदमों के संदर्भ में अभियोग पक्ष के वकील द्वारा दिया गया अधोलिखित वक्तव्य पठनीय हैः
फ्गोविंदपुर मे राधावल्लभ नामक एक हिंदू रहता था। उसका हरेंद्र नाम
का एक बेटा था। गोविंदपुर में एक मुस्लिम महिला भी रहती थी, जो
दूध बेचा करती थी। गांव के स्थानीय मुसलमानों को संदेह था कि हरेंद्र
का दूध बेचने वाली मुस्लिम औरत से अवैध संबंध है। उन्हें इस बात
पर गुस्सा था कि एक मुस्लिम महिला एक हिंदू की रखैल बन कर रहे।
उन्होंने फैसला किया कि इस अपमान का बदला राधावल्लभ के परिवार
से लिया जाए। गोविंदपुर के मुसलमानों की एक बैठक हुई और उसमें
हरेंद्र को बुलाया गया। जैसे ही हरेंद्र उस मीटिंग में गया, वहां से उसका
चीत्कार सुनाई दिया। उसे बुरी तरह से मारा-पीटा गया था और जिस
मैदान में मीटिंग हुई थी वहीं वह बेहोश पड़ा था। इस हमले के बाद भी
मुसलमान संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने राधावल्लभ से कहा कि जब तक वह,
उसका परिवार और बच्चे इस्लाम धर्म ग्रहण नहीं कर लेते, तब तक वे
उसके बेटे द्वारा किए गए गलत काम को माफ नहीं करेंगे। राधावल्लभ
ने अपनी पत्नी और बच्चों को अन्यत्र भेजने की योजना बनाई। मुसलमानों
को इस योजना का पता चल गया। अगले दिन जब राधावल्लभ की पत्नी
कुसुम अपना आंगन धो रही थी तो मुसलमान आए और राधावल्लभ को
पकड़ लिया और कुछ लोग कुसुम को उठाकर ले गए। कुछ दूर ले जाने
के बाद लाकर और महजर नामक दो मुसलमानों ने उससे बलात्कार किया
और उसके जेवर उतार लिए। बाद में जब वह होश में आई तो अपने घर
की तरफ भागी। हमलावरों ने फिर उसका पीछा किया, परंतु वह अपने
घर पहुंचने में सफल हो गई और घर पहुंचकर उसने अपने आपको एक