पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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कमरे में बंद कर लिया। हमलावरों ने उसके कमरे का दरवाजा तोड़ दिया,
उसे पकड़ लिया और उसे फिर सड़क पर ले आए। उन्होंने उसे धमकी दी
कि अब उसके साथ सड़क पर ही बलात्कार किया जाएगा। परंतु रजनी नामक
एक और महिला की सहायता से वह बच निकली और उसने रजनी के घर में
आश्रय लिया। इसी बीच गोविंदपुर के मुसलमानों ने कुसुम के पति राधावल्लभ
को बहुत ही अपमानजनक स्थिति में गोविंदपुर की सड़कों पर घुमाया। अगले
दिन मुसलमानों ने गोविंदपुर से पुलिस थाने जाने वाली सड़कों पर निगरानी रखी,
ताकि राधावल्लभ और उसकी पत्नी को इस सब की रिपोर्ट लिखवाने से रोका
जा सके।य्ऽ
बिना किसी पश्चाताप और बिना किसी शर्म के लोगों ने स्त्रियों के साथ ऐसे पाशविक अत्याचार किए तथा उनके भाई-बिरादरी वालों ने उनकी निंदा तक नहीं की। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि दोनों समुदायों में कितना अधिक आपसी विद्वेष और वैर-भाव था। दोनों तरफ के आक्रोश से यह लगता है कि दो राष्ट्र आपस में युद्ध कर रहे हैं। हिंदुओं ने मुसलमानों के और मुसलमानों ने हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा की, लूटपाट की और धार्मिक स्थानों को नष्ट किया। और भी सभी प्रकार के अत्याचार किए - शायद मुसलमानों ने हिंदुओं के विरुद्ध कुछ ज्यादा और हिंदुओं ने मुसलमानों के विरुद्ध कम। आगज़नी की ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिसमें मुसलमानों ने हिंदू घरों को जिस तरह आग लगाई उसमें हिंदुओं के समूचे परिवार के पुरुष, स्त्री और बच्चे जीवित ही भून दिए गए। और देखने वाले मुसलमानों को बड़ी प्रसन्नता होती थी। आश्चर्य की बात यह है कि जानबूझकर निर्दयतापूर्वक की गई इस कू्ररता को अत्याचार नहीं माना गया, जिनकी निंदा की जाती, बल्कि लड़ाई का एक ही तरीका माना गया, जिसके लिए माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं थी। इस प्रकार के शत्रुतापूर्ण अत्याचारों से क्षुब्ध होकर एक कांग्रेसी अखबार ‘हिंदुस्तान’ के संपादक ने श्री गांधी की हिंदू-मुस्लिम एकात स्थापित करने के प्रयासों की संपूर्ण असफलता को रेखांकित किया। आक्रोशपूर्ण भाषा का उपयोग करते हुए अत्यंत निराशा भरे शब्दों में इसने यह लिखाः
फ्आज के भारत और भारत राष्ट्र के बीच, एक ऐसे अपरिष्कृत यथार्थ
जो अपने आपको आगज़नी और कत्लेआम में प्रकट करता है और अपने
आपको धोखा देनेवाले देशप्रेमी की कल्पना के बीच बहुत ही अधिक दूरी
है। हजारों मंचों से हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करना या उसे कलात्मक
ऽ 25 अगस्त, 1936 को नागपुर के ‘सावधान’ नामक मराठी साप्ताहिक में प्रकाशित रिपोर्ट का रूपांतर।