7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 187

178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

सुर्खियां देना एक ऐसे भ्रम को बनाए रखने के समान है जिसका धुंधुआता

ढांचा पल भर में उस समय बिखर जाता है जब आरोप-प्रत्यारोप होते हैं

या मस्जिदों और मंदिरों को भ्रष्ट किया जाता है। शांति और सद्भाना के

बारे में सरोजिनी नायडू की कुछ कविताएं गाकर......देश का कोई भला

नहीं होने वाला। कांग्रेस की प्रेसीडेंट हिंदू-मुस्लिम एकता विषय पर कुछ

व्याख्यान करती रही हैं। यह विषय उन्हें बहुत ज्यादा प्यारा है और वह

भांति-भांति से इस पर अपने विचार प्रकट करती हैं। यह उनकी बुद्धिमत्ता

का परिचायक तो है, परंतु इससे समस्या अछूती ही रह जाती है। करोड़ों

देशवासी इस एकता की बात का समर्थन तभी करेंगे, जब वह केवल नेताओं

की जबान पर न हो, बल्कि करोड़ों देशवासियों के दिलों में हो।य्ऽ

हिंदू-मुस्लिम एकता की निरर्थकता को प्रकट करने के लिए मैं इन शब्दों से अच्छी और कोई शब्दावली नहीं रख सकता। अब तक हिंदू-मुस्लिम एकता कम से कम दिखती तो थी, भले ही वह मृग-मरीचिका क्यों न हो। आज तो न वह दिखती है और न ही मन में है। यहां तक कि अब तो श्री गांधी ने भी इसकी आशा छोड़ दी है और शायद अब वह समझने लगे हैं कि यह एक असंभव कार्य है।

परंतु ऐसे लोग अब भी हैं जो पिछले 20 वर्षों के इतिहास की अनदेखी करके हिंदू-मुस्लिम एकात की संभावना में विश्वास रखते हैं। उनके इस विश्वास के दो आधार लगते हैं। पहला, वे यह विश्वास करते हैं कि केंद्रीय सरकार इतनी प्रभावपूर्ण होगी कि विभिन्न वर्गों के लोगों को एक राष्ट्र में ढाल देगी। दूसरे, वे यह समझते हैं कि मुसलमानों की मांगों का संतोषजनक समाधान हिंदू-मुस्लिम एकात की प्राप्ति का एक साधन बनेगा।

यह सच है कि सरकार एकता स्थापित करने वाली शक्ति होती है और ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जब एक दूसरे से भिन्न विचारों के व्यक्ति एक ही सरकार के अंतर्गत रहने के कारण सम विचार वाले बन गए। परंतु हिंदू लोग जो सरकार पर इसलिए निर्भर रह रहे हैं कि सरकार में एकता बनाए रखने की शक्ति होती है, वे यह भूल जाते हैं कि सरकार के एकता बनाए रखने की शक्ति की काम करने की भी सीमाएं होती हैं। सरकार की एकीकरण की शक्ति के रूप में काम करने की सीमाएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि लोगों में विलयन की कितनी संभावनाएं हैं। जिस देश में जाति, भाषा और धर्म एकरूपता प्राप्त करने के मार्ग में नहीं आते, वहां सरकार एकरूपता लाने की शक्ति के रूप में बहुत प्रभावकारी होती है। दूसरी

ऽ 16.08.1926 के टाइम्स ऑफ इंडिया के ‘थू्र इंडियन आइज़’ शीर्षक कॉलम से उद्धृत।