पाकिस्तान का हिंदू विकल्प
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समझौता करने पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। उनकी नीति यह थी कि हर प्रजाजन को कोई भी वृत्ति अपनाने की आजादी होनी चाहिए, क्योंकि इसी आजादी के कारण वे स्वयं भी महान बने थे। इन स्वतंत्र नागरिकों (फ्री मैन) के बीच कानूनी हैसियत के भेद-भाव को मिटाकर इसने यह काम पूरा कर दिया जैसे व्यापार, साहित्य तथा सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता की भावना पहले से ही कर रहे थे। धर्म या जाति के किसी भी झगड़े के बगैर सभी राष्ट्रीय भेदभाव एक सांझे साम्राज्य के विचार में घुलते-मिलते गए।
रोमन साम्राज्य द्वारा स्थापित यह एकता केवल राजनीतिक एकता थी। यह राजनीतिक एकता कितने समय तक बनी रही? ब्राइस के ही शब्दों मेंः
फ्मंथर गति से कार्यशील इन प्रभावों से अभी एकता स्थापित हो ही पाई
थी कि अन्य प्रभावों के कारण इस एकता को खतरा पैदा होने लगा। नए
शत्रु सीमाओं पर आक्रमण करने लगे, जबकि भीतरी ढांचा सत्ता के आपसी
संघर्षों के कारण ढीला पड़ने लगा, जिसके फलस्वरूप बाद में आने वाला
हर सम्राट या तो मृत्यु को प्राप्त होता गया या फिर उसे गद्दी से हटा दिया
गया। वेलेरियन के पतन के बाद फैली अराजकता के काल में साम्राज्य के
प्रत्येक भाग में सेना ने अपने-अपने सेनापतियों का चयन किया। फिर उन्होंने
बड़े-बड़े प्रांतों पर राज करना शुरू कर दिया और राजधानी के स्वामी के
प्रति उन्होंने कोई वफादारी नहीं रखी। यदि डायोक्लेशियन जैसा सक्रिय और
सक्षम राजकुमार न होता, जिसने बड़ी कुशलतापूर्वक अलग-अलग टुकड़ों
को आपस में बांधे रखा और नई समस्याओं के हल के लिए उपाय खोजे,
तो साम्राज्य के पश्चिमी आधे भाग के विघटन की प्रत्याशा दो सौ वर्ष
पहले ही की जा सकती थी। उसने सत्ता के विभाजन और स्थानीयकरण
की नीति अपनाई जिसके पीछे तथ्य यह था कि कमजोर दिल वाले अपनी
धड़कनों को शरीर के अंगांगों को अनुभव नहीं करा सकते। उसने सर्वोच्च
सत्ता चार राजाओं में बांट दी जो चार राजधानियों से संयुक्त राजाओं की
तरह शासन करने लगे, और फिर पूर्वी देशों वाली एक तड़क-भड़क
का वातावरण पैदा करके एक काल्पनिक शक्ति प्रदान की, यद्यपि उस
तड़क-भड़क को उनके पुरखे कभी पसंद नहीं करते। रोम के इस परम
अधिकार को निकोमेडिया और मिलान की प्रतिद्वंद्विता से भारी खतरा पैदा
हो गया।य्
इस प्रकार यह बात स्पष्ट है कि रोमन साम्राज्य के स्थायित्व और स्थिरता के