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पाकिस्तान का हिंदू विकल्प

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बहुदेववाद के सिद्धांत से उल्टा था, ठीक उसी तरह जैसे सीजर का सर्वव्यापी

शासन उससे पहले के अनेक छोटे-छोटे राज्यों और नगर गणराज्यों से भिन्न

था।य्ऽ

ब्राइस ने रोमन साम्राज्य की अस्थिरता और उसके उत्तरवर्ती होली रोमन एम्पायर की अपेक्षाकृत स्थिरता के बारे में जो कुछ कहा है, उससे यदि भारत कोई पाठ सीखना चाहता है तो उसका यह तर्क कि रोमन साम्राज्य की अस्थिरता का कारण उसकी केवल राजनीतिक एकता था और होली रोमन एम्पायर इस कारण ज्यादा स्थिर था क्योंकि यह नैतिकता और सामाजिक एकता की अधिक टिकाऊ नींव पर खड़ा था, जो एक सांझी (सामान्य) आस्था पर आधारित था, और इस तर्क के पीछे मानव अनुभव है, तो यह सीख स्पष्ट है कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच मिलन या एकता की कोई संभावना नहीं है। सांझे या एक समान धर्म को जोड़ने वाली शक्तियों का यहां अभाव है। आध्यात्मिक दृष्टि से हिंदू और मुसलमान केवल ऐसे दो वर्ग या दो संप्रदाय नहीं हैं जैसे प्रोटेस्टेंट्स और कैथोलिक या शैव और वैष्णव, बल्कि वे तो दो अलग-अलग प्रजातियां हैं। इस राय के अनुसार न तो हिंदुओं से और न ही मुस्लिमों से यह मानने की आशा की जा सकती है कि उन दोनों में ही मानवता की भावना का अनिवार्य गुण विद्यमान है और वे अनेक नहीं हैं, बल्कि एक हैं, और उनके बीच में अंतर संयोग से बढ़कर और कुछ नहीं है। उनके लिए तो देवत्व ही विभाजित है, और देवत्व के विभाजन के कारण उनकी मानवता भी विभाजित है और मानवता के विभाजन के कारण उन्हें हमेशा अलग रहना है। उनको एक ही छत्रछाया के अंतर्गत लाने का कोई माध्यम नहीं है।

सामाजिक एकता के बिना राजनीतिक एकता प्राप्त करना कठिन है। यदि यह प्राप्त कर भी ली गई तो वह गर्मी में बोए गए पौधों की तरह कमजोर होगी, जो तेज आंधी से उखड़ सकता है। राजनीतिक एकता होने से हिंदुस्तान एक रियासत

ऽ क्रिश्चियन चर्च ने होली रोमन एम्पायर के एकीकरण में एक निष्क्रिय भूमिका अदा नहीं की। इसने इस

प्रक्रिया में बहुत सक्रिय भाग लिया। यह देखते हुए कि एक के बाद दूसरी संस्था विनष्ट होती जा रही

थी, और विचित्र जनजातियों के उभरने के कारण देश और नगर किस तरह एक दूसरे से अलग होते जा

रहे थे और परस्पर संपर्क करने में होने वाली कठिनाइयां बढ़ती जा रही थीं, क्रिश्चियन चर्च ने धार्मिक

भाईचारे को बचाने के लिए चर्च के संगठन को मजबूत बनाया, और बाहरी एकीकरण के हर बंधन को

कस दिया। आस्था की आवश्यकताएं अब भी अधिक शक्तिशाली थीं। यह बताया गया कि सत्य एक

ही है और जो कोई उसे चाहते हैं, यह उनको एक बंधन में बांधेगा, इसलिए उस संस्था में रहते हुए

ही उसकी सुरक्षा की जा सकती है। भेड़ों के एक झुंड का एक ही गडरिया होता है।