7. पाकिस्तान का हिंदू विकल्प - Page 195

186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

तो बन जाएगा, परंतु एक रियासत एक राष्ट्र नहीं होता और एक रियासत, जो एक राष्ट्र नहीं है, अस्तित्व के संघर्ष में उसके बने रहने की बहुत संभावना नहीं होती। यह बात विशेषकर उस समय और अधिक सच हो जाती है जब आधुनिक काल की एक सबसे गतिशील शक्ति कौमियत या राष्ट्रीयता है, जो तमाम मिली-जुली रियासतों को नष्ट करके, उनका विघटन करके अपने आपको स्वतंत्र रूप में रखना चाहती है। इस तरह एक मिश्रित और मिली-जुली रियासत को खतरा बाहरी हमले से इतना नहीं होता, जितना कि बिखरे हुए राष्ट्रों को इच्छा-विरुद्ध जकड़कर और दबाकर बनाई गई राष्ट्रीयता के उभरने से होता है। जो लोग पाकिस्तान का विरोध करते हैं, उन्हें न केवल इस खतरे को अपने दिमाग में रखना चाहिए, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि दबाकर रखे गए राष्ट्रों द्वारा मिली-जुली रियासतों को तोड़ने की और अपना अलग घर बनाने की जो कोशिश की जाएगी, उसकी निंदा नहीं की जा सकती बल्कि आत्मनिर्णय के सिद्धांत के अनुसार उसे उचित ठहराया जा सकता है।