पाकिस्तान का मुस्लिम विकल्प
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- गोवध पर प्रतिबंध लगाने वाले कोई कानून वैध नहीं होगा और न ही
इस्लाम के प्रचार तथा इस्लाम धर्म में परिवर्तन करने वाला कोई कानून वैध
होगा यदि इसे विधान-मंडल के 66 प्रतिशत मुस्लिम सदस्यों की सहमति
से पारित न किया गया हो।
- संविधान में परिवर्तन या संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत के बिना,
जिसमें विधान-मंडल के 66 प्रतिशत मुस्लिम सदस्यों का बहुमत भी है,
संविधान में ऐसा परिवर्तन या संशोधन वैध नहीं माना जाएगा।
मेरा यह अनुमान कोरी कल्पना पर आधारित नहीं है और न ही अनिच्छापूर्वक या जल्दबाजी में पाकिस्तान स्वीकार कराने के लिए हिदुंओं को भयभीत करने के लिए है। यदि मैं कहूं तो यह मुस्लिम स्रोत से प्राप्त जानकारी के आधार पर सोच-समझकर लगाया गया अनुमान है।
मुस्लिम विकल्प किस तरह को होने की संभावना है, इसका पता हैदराबाद के महामहिम निजाम के अपने राज्य के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले संवैधानिक सुधारों की प्रकृति से चलता है।
हैदराबाद सुधार योजना एक अनूठी योजना है। इसमें ब्रिटिश हिंदुस्तान की सांप्रदायिक प्रतिनिधि वाली योजना को नहीं माना गया है। इसके स्थान पर इसमें क्रियात्मक (फंक्शनल) प्रतिनिधित्व प्रतिस्थापित किया गया है, अर्थात् वर्गों और व्यवसाय के अनुसार प्रतिनिधित्व। इस विधान-मंडल में 70 सदस्य होंगे और इसका गठन इस प्रकार होगाः