पाकिस्तान का मुस्लिम विकल्प
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सबसे उल्लेखनीय विशिष्टता है नए हैदराबाद विधान-मंडल में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच स्थानों का प्रस्तावित बंटवारा। महामहिम निजाम द्वारा अनुमोदित इस योजना में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है। इसे क्रियात्मक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ बनाए रखा गया है। यह योजना संयुक्त निर्वाचक-मंडलों के जरिए लागू होगी परंतु विधान-मंडल सहित प्रत्येक निर्वाचित निकाय में दोनों मुख्य संप्रदायों का समान प्रतिनिधित्व होगा ख्1, और किसी उम्मीदवार को तब तक नहीं चुना जाएगा जब तक कि डाले गए कुल मतों में से उसे अपने संप्रदाय के 40 प्रतिशत मत नहीं मिलते। उनकी संख्या का विचार किए बिना हिंदुओं और मुस्लिमों के समान प्रतिनिधित्व का सिद्धांत ख्2, न केवल हर निर्वाचित निकाय पर लागू होगा, बल्कि उस निकाय के निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों पर भी लागू होगा।
समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को न्यायोचित ठहराते हुए यह कहा गया है किः
फ्मुस्लिम संप्रदाय की ऐतिहासिक स्थिति के कारण और रियासत में उसके
महत्व के कारण राज्य में मुस्लिम संप्रदाय को अल्पमत का दर्जा नहीं दिया
जा सकता।य्
हाल ही में एक श्री अमीर अकबर अली खां ने, जो अपने आपको नेशनलिस्ट पार्टी का लीडर कहता है, ब्रिटिश हिंदुस्तान में हिंदू-मुस्लिम समस्या के समाधान के लिए समाचार पत्रों ख्3, में निम्नलिखित सुझाव दिए हैंः
- हिंदुस्तान का भावी संविधान देश की पर्याप्त सैनिक सुरक्षा के व्यापक
आधार पर तैयार होना चाहिए और इसे लोगों को सैनिक प्रवृत्ति वाला
बनाना चाहिए। हिंदुओं को भी मुस्लिमों की तरह सैनिक प्रवृत्ति वाला होना
चाहिए।
- वर्तमान परिस्थितियां दोनों संप्रदायों को यह मांग करने का उत्कृष्ट अवसर
देती है कि हिंदुस्तानी फौज में हिंदू और मुस्लिम बराबर संख्या में होने
चाहिएं और कोई भी रेजिमेंट सांप्रदायिक आधार पर न बनाई जाकर क्षेत्रीय
आधार पर बनाई जानी चाहिए।
- सुधारों की इस योजना के अंतर्गत एक केंद्रीय विधान-मंडल के अतिरिक्त अन्य लोक निकाय भी होंगे
जैसे पंचायतें, ग्रामीण बोर्ड, नगर पालिकाएं ओर टाउन कमेटियां।
- 1931 की जनगणना के अनुसार, हैदराबाद रियासत की जनसंख्या (बरार के अतिरिक्त) इस प्रकार हैः
हिंदूः 96,99,615_ अछूतः 24,73,230_ मुस्लिमः 15,34,666_ ईसाईः 1,51,352_ अन्यः 5,77,255_
योगः 1,44,36,148
- देखिए, बांबे सेटिनल, 22 जून, 1940. श्री मीर अकबर अली खां का कहना है कि इन प्रस्तावों पर
उन्होंने कांग्रेस के भूतपूर्व अध्यक्ष श्री श्रीनिवास आयंगर से चर्चा की थी और प्रकाशित ये प्रस्ताव वस्तुतः
यही प्रस्ताव हैं जिन्हें श्री आयंगर ने स्वीकार किया था।