पाकिस्तान का मुस्लिम विकल्प
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विरोधी थे। वे मुस्लिम लीग के विरोधी थे, क्योंकि एक तो वे पाकिस्तान का विरोध करते थे ओर दूसरे अपने अधिकारों के समर्थन के लिए वे अंग्रेजों पर निर्भर नहीं रहना चाहते थे। ख्1,
वे नेशनलिस्ट मुसलमानों अर्थात् पूरी तरह कांग्रेस समर्थकों के भी विरुद्ध थे, क्योंकि कांग्रेस पर उन्होंने मुसलमानों की संस्कृति और धार्मिक अधिकारों के प्रति उदासीन होने का आरोप लगाया था। ख्2,
इन सबके होते हुए भी हिंदुओं ने इस आजाद मुस्लिम सम्मेलन को मित्रों का सम्मेलन बताते हुए इसका स्वागत किया। परंतु सम्मेलन में जो प्रस्ताव पास किए गए, उनसे मुस्लिम लीग और आजाद मुस्लिम सम्मेलन के बीच कोई अंतर नजर नहीं आता। आजाद मुस्लिम सम्मेलन में जो प्रस्ताव पास किए गए, उनमें से तीन प्रस्तावों से इस समस्या के बारे में उनका दृष्टिकोण पता चलता है। पहले प्रस्ताव में कहा गया हैः
फ्यह सम्मेलन जो ऐसे हिंदुस्तानी मुस्लिमों का प्रतिनिधि सम्मेलन है जो
देश के लिए पूरी आजादी पाना चाहते हैं और जिसमें हर प्रांत से प्रतिनिधि
और डेलीगेट आए हैं, मुस्ल्मि समुदाय के हितों और समूचे देश के हितों
से संबद्ध सभी प्रश्नों पर पूरी तरह और सावधानीपूर्वक विचार करने के
बाद निम्नलिखित घोषणा करता हैः
फ्हिंदुस्तान की भौगोलिक और राजनीतिक सीमाएं पूर्णतः एक होंगी
और इस प्रकार यह सभी नागरिकों का साझा वतन है, भले ही उनकी
जाति या धर्म कोई भी क्यों न हो और वे इसके सभी संसाधनों के साझे
मालिक हैं। देश का कोना-कोना मुस्लिमों का घर है व वतन है जो अपने
मजहब और संस्कृति की ऐतिहासिक श्रेष्ठता को सदा याद रखते हैं और जो
उन्हें अपने जीवन से भी ज्यादा प्यारे हैं। जीवन के हर क्षेत्र में और सभी
कार्यकलापों में देश के सभी निवासियों के समान अधिकार और दायित्व हैं।
इन अधिकारों और दायित्वों के फलस्वरूप हर हिंदुस्तानी मुस्लिम निस्संदेह
भारतीय है, और देश के हर भाग में किसी भी हिंदुस्तानी नागरिक को
- बताया जाता है कि सम्मेलन के एक प्रमुख सदस्य मुफती किफायतुल्ला ने अपने भाषण में कहा - ‘हमें
यह दिखाना होगा कि आजादी की लड़ाई में हम और किसी समुदाय से पीछे नहीं हैं।’ वह इस बात
की घोषणा करने को इच्छुक था कि हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों की सरकार पर
निर्भर नहीं रहना चाहते, हम अपने धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्वयं समुचित रक्षोपाय कर
लेंगे और इसके लिए हम किसी भी ऐसी पार्टी से संघर्ष कर लेंगे, भले ही वह कितनी भी ताकतवर
क्यों न हो, जो हमारे संरक्षणों को स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि हम आजादी के लिए सरकार से संघर्ष
करेंगे। (जोरदार हर्षध्वनि) हिंदुस्तान टाइम्स, 30 अप्रैल, 1940.
- हिंदुस्तान टाइम्स के उसी अंक में देखिए मोहम्मद हिफजुल्ल रहमान और डॉ. के.एम. अशरफ के भाषण।