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पाकिस्तान का मुस्लिम विकल्प

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निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों को तैयार करेः

फ्यह सम्मेलन 27 सदस्यों का एक बोर्ड नियुक्त करता है। यह

बोर्ड पूरी जांच, परामर्श और विचार-विमर्श करने के बाद अपनी सिफारिशें

तैयार करेगा, जो सम्मेलन के अगले अधिवेशन में प्रस्तुत की जाएंगी, ताकि

सम्मेलन में सांप्रदायिक प्रश्न के स्थायी राष्ट्रीय समाधान निकालने में इन

सिफारिशों का उपयोग किया जा सके। ये सिफारिशें दो महीने में प्रस्तुत

कर दी जानी चाहिएं। बोर्ड को विचारार्थ सौंपे गए विषय निम्नलिखित हैंः

  1. मुस्लिमों की संस्कृति की व्यक्तिगत कानून और धार्मिक अधिकारों की

सुरक्षा।

  1. मुस्लिमों के राजनीतिक अधिकार और उनका संरक्षण।

  2. हिंदुस्तान का भावी संविधान गैर-एकात्मक और संघीय हो और संघर

सरकार के हाथों में नितांत आवश्यक और अपरिहार्य शक्तियां ही रहनी

चाहिएं।

  1. मुस्लिमों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा

के लिए और सरकारी नौकरियों में उनके हिससे के लिए संविधान में

प्रावधान हो।

  1. बोर्ड को किसी भी खाली पद को उपयुक्त तरीके से भरने का अधिकार

होगा। बोर्ड को अन्य सदस्य सहयोजित करने का अधिकार भी होगा।

बोर्ड को अन्य मुस्लिम निकायों से विचार करने का भी अधिकार होगा

और यदि बोर्ड आवश्यक समझे तो उसे देश के किसी भी जिम्मेदार

संगठन से परामर्श करने का अधिकार होगा। बोर्ड के 27 सदस्यों को

अध्यक्ष द्वारा मनोनीत किया जाएगा।

  1. बैठक के लिए 9 सदस्यों का कोरम होगा।

  2. चूंकि विभिन्न समुदायों के सांप्रदायिक अधिकारों की सुरक्षा का निर्णय

सम्मेलन द्वारा पारित प्रस्तावों के अनुसार निर्वाचित संविधान सभा करेगी,

इसलिए सम्मेलन यह घोषणा करना जरूरी समझता है कि इस संस्था

के मुस्लिम सदस्यों का चुनाव मुस्लिम स्वयं ही करेंगे।’’

यह जानने के लिए कि आजाद मुस्लिम कांफ्रेंस मुस्लिमों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए क्या उपाय निर्धारित करेगी, हमें इस बोर्ड की रिपोर्ट की प्रतीक्षा करनी होगी। ख्1, परंतु यह आशा करने का कोई कारण नजर नहीं आता कि वे उपाय मेरे द्वारा पाकिस्तान के विकल्प के अनुमानों से कुछ भिन्न होंगे। इस बात की भी अनदेखी नहीं