8. पाकिस्तान का मुस्लिम विकल्प - Page 205

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

की जा सकती कि आजाद मुस्लिम कांफ्रेंस ऐसे मुस्लिमों की संस्था है जो न केवल मुस्लिम लीग के विरोधी हैं, बल्कि नेशनलिस्ट मुस्लिमों के भी उतने ही विरोधी हैं। इसलिए यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं कि वे हिंदुओं के प्रति उससे अधिक सदाशयता दिखाएंगे, जितनी लीग ने दिखाई है या दिखाएगी।

मान लीजिए कि मेरा अनुमान ठीक निकलता है, तो यह जानना रूचिकर होगा कि हिंदू इसके उत्तर में क्या कहेंगे। क्या वे पाकिस्तान के ऐसे विकल्प को अधिक पसंद करेंगे अथवा ऐसे विकल्प की तुलना में पाकिस्तान को ही तरजीह देंगे? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं, जिनका उत्तर मैं हिंदुओं और उनके नेताओं पर छोड़ता हूं। मैं तो इस बारे में सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि इस प्रश्न पर अपना दृष्टिकोण निर्धारित करते समय वे कुछ महत्वपूर्ण बातों को अपने ध्यान में रखें। विशेष रूप से उन्हें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि मात्र पॉलिटिक ख्2, और ग्रावामिन पॉलिटिक ख्3, में अंतर होता है, कम्यूनिटास कम्युनिटेटम में और नेशन ऑफ नेशंस में अंतर होता है। निर्बलों की आशंकाएं दूर करने वाले रक्षोपायों और ताकतवर लोगों की आकांक्षाएं पूरी करने के कपटपूर्ण उपायों में अंतर होता है। रक्षोपायों की व्यवस्थाएं करने और देश को सौंप देने के बीच अंतर होता है। इसके अतिरिक्त उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शिकायतें बनाकर सत्ता हथियाने वालों को जो आराम से दिया जा सकता है, वह सत्ता की राजनीति वालों को नहीं दिया जा सकता। जो एक संप्रदाय को दिया जा सकता है, वह एक राष्ट्र को नहीं दिया जा सकता। और जो कुछ एक निर्बल को उसकी रक्षा करने के उपाय स्वरूप दिया जा सकता है, वह शायद एक ताकतवर को न दिया जा सके, जो उसका उपयोग आक्रमण के हथियार के रूप में कर सकता है।

ये महत्वपूर्ण विचारार्थ विषय हैं, और यदि हिंदुओं ने इनकी अनदेखी कर दी तो उन्हें स्वयं भी इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह इसलिए कि मुस्लिम विकल्प वास्तव में एक अत्यंत भयावह और खतरनाक विकल्प है।

  1. यह रिपोर्ट अब तक भी प्रकाशित नहीं हुई है।

  2. माच पॉलिटिक का अर्थ है सत्ता की राजनीति।

  3. ग्रावामिन पॉलिटिक का तात्पय्र है कि मुख्य रणनीति यह हो कि शिकायतें पैदा करके सत्ता हथियाई

जाए।